बिहार के शिक्षा क्षेत्र में एक बड़ा और सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। राज्य के सरकारी स्कूलों में छात्र-शिक्षक अनुपात (Pupil Teacher Ratio – PTR) अब राष्ट्रीय औसत से बेहतर स्थिति में पहुंच गया है। यह परिवर्तन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की दूरदर्शिता और शिक्षकों की लगातार नियुक्ति के कारण संभव हुआ है। वर्तमान में राज्य में शिक्षकों की संख्या भी बढ़कर करीब 6 लाख से अधिक हो गई है। जिससे अब primary school से लेकर higher secondary classes उच्च माध्यमिक कक्षाओं तक के छात्र-शिक्षक अनुपात में आश्चर्यजनक सुधार दर्ज हुआ है।
तीन लाख से अधिक शिक्षकों की बहाली बनी आधार
पिछले तीन से चार वर्षों के दौरान बिहार सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में एक साहसिक कदम उठाते हुए तीन लाख से अधिक शिक्षकों की बहाली की है। हाल ही में बीपीएससी BPSC के माध्यम से करीब 1.20 लाख Appointment letter to teachers शिक्षकों को नियुक्ति पत्र दिया गया। यह कदम सिर्फ संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता और शिक्षकों की उपलब्धता में भी अभूतपूर्व सुधार हुआ है।
छात्र-शिक्षक अनुपात में आया क्रांतिकारी बदलाव
शिक्षा विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, बिहार में कक्षा 1 से 12 तक समेकित रूप से छात्र-शिक्षक अनुपात अब 28:1 हो गया है, जो कि राष्ट्रीय औसत (30:1 या 40:1) से बेहतर है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति National Education Policy की रिपोर्ट में बिहार के विभिन्न स्तरों पर PTR निम्नानुसार बताया गया है:
कक्षा 1 से 5 तक – 32:1
कक्षा 6 से 8 तक – 19:1
कक्षा 9 से 10 तक – 30:1
कक्षा 11 से 12 तक – 31:1
इस औसत की तुलना राष्ट्रीय मानकों से की जाए तो प्राथमिक स्तर पर राष्ट्रीय PTR 40:1 और उच्च स्तर पर 30:1 है, जिसे बिहार ने पीछे छोड़ दिया है।
2015 से अब तक की प्रगति: एक ऐतिहासिक तुलना
वर्ष 2015-16 में बिहार के सरकारी स्कूलों में PTR की स्थिति बहुत चिंताजनक थी। उस समय प्राथमिक विद्यालयों में यह अनुपात 89:1 तक पहुंच गया था।
वर्ष 2020-21 में सुधार के संकेत मिले और समग्र PTR 47:1 पर आ गया।
प्राथमिक स्कूल – 57:1
उच्च प्राथमिक – 21:1
माध्यमिक स्कूल – 52:1
उच्च माध्यमिक – 60:1
अब यह अनुपात घटकर औसतन 28:1 हो गया है, जो कि किसी भी राज्य के लिए शिक्षा सुधार की दिशा में एक प्रेरक उदाहरण है।
2 करोड़ से अधिक छात्रों के लिए हो रहा बदलाव
बिहार राज्य के मौजूदा बिहार शिक्षा विभाग Government school में 1 से 12वां तक 2 करोड़ 13 लाख 48 हजार छात्र नामांकित हैं। इतनी बड़ी छात्र संख्या के बाद भी Teacher-student ratio अनुपात में यह सुधार दर्शाता है कि राज्य की Nitish Kumar Government ने नियुक्ति के साथ-साथ शैक्षणिक प्रबंधन पर भी ध्यान केंद्रित किया है।
शिक्षा विभाग का दावा: और होगा सुधार
Bihar Education Department बिहार शिक्षा विभाग अपर मुख्य सचिव डॉ.एस. सिद्धार्थ का कहना है कि राज्य में शिक्षकों की यह लगातार बहाली राष्ट्रीय औसत से बेहतर PTR हासिल करने में सहायक ही रही है। आने वाले महीनों में जब हाल ही में नियुक्त शिक्षकों की सेवा शुरू हो जाएगी, तब यह अनुपात और बेहतर हो जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि अगले चरणों में और शिक्षकों की बहाली प्रक्रिया जारी रहेगी।
नीतीश सरकार की शिक्षा नीति का असर
2005 में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सत्ता में आने के बाद से ही शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। उन्होंने कहा भी है कि “शिक्षा के बिना समाज की प्रगति असंभव है।” इसी सोच के साथ सरकार ने शिक्षा को सामाजिक विकास और रोजगार से जोड़ते हुए कार्य किया है। शिक्षक बहाली को एक सतत प्रक्रिया बनाकर हजारों युवाओं को रोजगार भी दिया गया है।
शिक्षा के क्षेत्र में नई उम्मीद
बिहार जैसे जनसंख्या घनत्व वाले राज्य में, जहां शिक्षा की चुनौतियां लंबे समय से बनी रही हैं, वहां PTR में यह सुधार एक क्रांतिकारी परिवर्तन है। यह केवल संख्या का खेल नहीं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की ओर एक सशक्त कदम है। आने वाले समय में शिक्षक-छात्र अनुपात के और बेहतर होने की संभावना को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि बिहार शिक्षा के क्षेत्र में एक नई पहचान बनाने की ओर अग्रसर है। यह मॉडल अन्य राज्यों के लिए भी एक प्रेरणा बन सकता है। प्रकाश कुमार पांडेय




