मध्यप्रदेश सरकार ने प्रदेश में ई-मोबिलिटी को बढ़ावा देने के लिए 582 इलेक्ट्रिक बसों के संचालन की योजना को अंतिम रूप दे दिया है। यह बसें भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन और सागर में चलाई जाएंगी। इस योजना को केंद्र सरकार से स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है।
इलेक्ट्रिक बसों का संचालन इन शहरों में होगा
इंदौर – 150 बसें
भोपाल – 100 बसें
ग्वालियर – 100 बसें
जबलपुर – 100 बसें
उज्जैन – 100 बसें
सागर – 32 बसें
चार्जिंग और डिपो अधोसंरचना का विकास
इन्हीं शहरों में नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा निविदा जारी कर बस संचालकों का चयन भी कर लिया गया है। चार्जिंग अधोसंरचना निर्माण पर 100% खर्च केंद्र सरकार वहन करेगी। बस डिपो के निर्माण पर 60% राशि केंद्र और 40% राज्य सरकार देगी। भोपाल और जबलपुर शहरों ने पहले ही डिपो निर्माण के लिए निविदा प्रक्रिया शुरू कर दी है। 34 चार्जिंग स्टेशनों पर कुल 190 चार्जिंग पॉइंट लगाए जा चुके हैं, विशेष रूप से भोपाल, इंदौर और जबलपुर शहरों में।
नीतिगत पहल
मध्यप्रदेश सरकार ने इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी 2025 लागू की है, जिसके अंतर्गत परिवहन कर में छूट। खरीद पर अनुदान और चार्जिंग ढांचे का विकास सुनिश्चित किया जा रहा है। इस नीति का उद्देश्य प्रदेश में लाइट इलेक्ट्रिक व्हीकल (LEV) जैसे ऑटो, टू-व्हीलर और मिनी बसों को भी बढ़ावा देना है।
इंदौर में पहले से चल रही 80 ई-बसें
इंदौर शहर में पहले ही शहरी मार्गों पर 80 इलेक्ट्रिक बसें चलाई जा रही हैं।
40 बसें फेम योजना के अंतर्गत और 40 बसें अमृत योजना 1.0 के तहत चलाई जा रही हैं।
चार्जिंग ढांचे पर केंद्र सरकार देगी 100% राशि
बस डिपो के निर्माण में 60% केंद्र और 40% राज्य सरकार योगदान देंगी। भोपाल और जबलपुर ने डिपो निर्माण के लिए निविदा जारी कर दी है। इसके साथ ही प्रदेश के भोपाल, इंदौर और जबलपुर में अब तक 34 चार्जिंग स्टेशनों पर 190 चार्जिंग पॉइंट लगाए जा चुके हैं। यह योजना मध्यप्रदेश इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी 2025 के अंतर्गत संचालित की जा रही है। जिसमें परिवहन कर में छूट और अनुदान जैसी सुविधाएँ दी जा रही हैं। इंदौर में 150, भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर और उज्जैन में 100-100 और सागर में 32 बसें चलाई जाएंगी। नगरीय विकास एवं आवास विभाग की ओर से निविदा जारी कर बस संचालकों का चयन कर लिया गया है। ई-बस सेवा को सुचारु रूप से संचालित करने के लिए बस डिपो और चार्जिंग अधोसंरचना का विकास किया जा रहा है।
यह पहल न केवल प्रदूषण नियंत्रण बल्कि हरित, टिकाऊ और आधुनिक शहरी परिवहन के दृष्टिकोण से एक बड़ा कदम मानी जा रही है।





