‘पंचायत सीजन 4’ PanchayatS4 का धमाकेदार अंत: फुलेरा में सत्ता का खेल जारी, सीजन 5 में क्या होगा? जानिए पूरी कहानी!
लोकप्रिय वेब सीरीज ‘पंचायत’ PanchayatS4 के चौथे सीजन ने एक बार फिर फुलेरा गांव की राजनीति और रिश्तों में नई हलचल पैदा कर दी है। दर्शकों को जहां शो की सादगी पसंद आई, वहीं राजनीति के बढ़ते प्रभाव ने कई पुराने इमोशनल एंगल को थोड़ा फीका कर दिया — यही बात कुछ दर्शकों को खटक भी गई।
कौन-कौन हैं ‘पंचायत 4’ में:
जितेंद्र कुमार: सचिव अभिषेक त्रिपाठी
नीना गुप्ता: मंजू देवी (प्रधान)
रघुबीर यादव: बृज भूषण उर्फ प्रधान जी
फैसल मलिक: प्रह्लाद पांडे (उपप्रधान)
चंदन रॉय: विकास शुक्ला (सहायक)
तृप्ति साहू: खुशबू (विकास की पत्नी)
सान्विका: रिंकी दुबे
दुर्गेश कुमार: भूषण उर्फ बनरकस
सुनीता राजवार: क्रांति देवी (भूषण की पत्नी)
अशोक पाठक और बुल्लू कुमार: बिनोद और माधव – भूषण के खास समर्थक
पंकज झा: विधायक चंद्रकिशोर सिंह
पंचायत 4 का धमाकेदार अंत: भूषण बना प्रधान, सचिव जी के फैसले पर सस्पेंस
सीजन 5 में रिश्ते, राजनीति और बदले की कहानी होगी और गहरी! वेब सीरीज़ ‘पंचायत सीजन 4’ का अंत एक बड़े राजनीतिक उलटफेर के साथ होता है — भूषण उर्फ बनरकस प्रधान का चुनाव जीत जाता है, वो भी 73 वोटों से। जीत की घोषणा होते ही बिनोद खुशी के मारे रोने लगता है और गांव में यह खबर आग की तरह फैल जाती है।
इस जीत से प्रधान जी, मंजू देवी और उनकी टीम स्तब्ध रह जाते हैं। दुखी प्रह्लाद, प्रधान जी को जैसे ही परिणाम बताते हैं, वे एक सिगरेट जलाते हैं और आत्मविश्वास के साथ कहते हैं – “हमारा दबदबा था, है, और रहेगा।” लेकिन उसी समय मंजू देवी की नेमप्लेट हटाई जाती है और भूषण नए प्रधान के रूप में पदभार संभाल लेता है।
इधर भूषण, सचिव अभिषेक से पूछता है कि क्या अब उसके नाम की तख्ती कार्यालय के दरवाजे पर लगेगी। अभिषेक शांत स्वभाव में कहता है कि “कम से कम 3-4 महीने तक तो मेरा ही नाम रहेगा।”
सीजन 5 में क्या होगा?
सीजन के अंत ने कई सवाल हवा में छोड़ दिए हैं:
क्या सचिव अभिषेक एमबीए के लिए फुलेरा छोड़ देगा?
अगर गया, तो रिंकी के साथ रिश्ते का क्या होगा?
क्या प्रधान जी और मंजू देवी राजनीति में वापसी करेंगे?
प्रह्लाद पांडे क्या अब विधायक बनने की राह पर हैं?





