उज्जैन डोंगला वेधशाला में सीएम डॉ. मोहन यादव बने शिक्षक…शून्य होती परछाई का राज समझाया
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव Chief Minister Dr. Mohan Yadav ने विज्ञान और भारतीय खगोलीय परंपरा को आत्मसात करते हुए शनिवार को उज्जैन जिले के डोंगला स्थित वराहमिहिर खगोलीय वेधशाला में 21 जून की विशेष खगोलीय घटना को प्रत्यक्ष देखा और विद्यार्थियों को सूर्य परिचालन व कालगणना का सजीव पाठ पढ़ाया।
सीएम डॉ.मोहन यादव बने शिक्षक
शून्य होती परछाई को देखा
सीएम ने सभी को सूर्य परिचालन समझाया
दोपहर 12:28 बजे लुप्त हुई डोंगला वेधशाला पर छांव
12:28 बजे हुई अनोखी खगोलीय घटना
दोपहर 12:28 बजे, मुख्यमंत्री ने शंकु यंत्र पर शून्य होती परछाई का अवलोकन किया। यह दृश्य इस बात का प्रमाण था कि सूर्य की उत्तर परम क्रांति (23° 26′) और डोंगला का अक्षांश एक समान होने के कारण इस विशेष दिन पर सूर्य की छाया पूर्णतः लुप्त हो जाती है। यही वह क्षण होता है जब सूर्य उत्तरायण से दक्षिणायण की ओर गमन करता है और दिनमान सबसे लंबा होता है।
मुख्यमंत्री ने उपस्थित जनसमूह, विद्यार्थियों, वैज्ञानिकों और जनप्रतिनिधियों को भारतीय खगोलशास्त्र और सूर्य के गमन से जुड़े सिद्धांतों को विस्तारपूर्वक समझाया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार उत्तरायण और दक्षिणायण का गमन पृथ्वी के अक्षीय झुकाव से उत्पन्न होता है और इसी के आधार पर दिन-रात की अवधि में परिवर्तन होता है। सीएम ने कहा भारत की कालगणना परंपरा वैज्ञानिक और अनुभवजन्य रही है। डोंगला जैसे स्थल इसका जीवंत प्रमाण हैं।”
सीएम ने संत टाटम्बरी सरकार से लिया आशीर्वाद
डोंगला रवाना होने से पहले मुख्यमंत्री मोहन यादव ने नागदा बायपास स्थित आश्रम में जाकर संत टाटम्बरी सरकार से आशीर्वाद लिया और पूजन कार्यक्रम में भाग लिया। डोंगला में हाईटेक तारा मंडल की स्थापना और इस विशेष खगोलीय दिन पर उसका लोकार्पण मध्य प्रदेश को खगोल विज्ञान के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने वाला कदम है। मुख्यमंत्री मोहन यादव की यह पहल न केवल शैक्षणिक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से प्रेरणादायक है, बल्कि बच्चों को भारतीय खगोलीय परंपरा से जोड़ने का एक अनूठा प्रयास भी है।





