उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे का विधिवत उद्घाटन कर इसे प्रदेश के विकास का नया आधार बताया। उन्होंने उद्घाटन समारोह के दौरान एक्सप्रेसवे पर यात्रा भी की और इसके किनारे लगे विकास प्रोजेक्ट्स की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह एक्सप्रेसवे पूर्वांचल को मुख्यधारा के विकास से जोड़ने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।
अब 3 घंटे हुई कम एक्सप्रेसवे से पूर्वांचल-नोएडा की दूरी
गोरखपुर समेत कई जिलों में होगा औद्योगिक निवेश और विकास
गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे से पूर्वांचल से दिल्ली की सीधे कनेक्टिविटी
इससे जुड़े जिलों को मिलगी विकास की रफ्तार
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दी सौगात
पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के लिंक रोड का किया उद्घाटन
सीएम ने पिक्चर गैलरी का दौरा किया
2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य
योगी आदित्यनाथ ने कहा, “बीजेपी की डबल इंजन सरकार वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को लेकर पूरी प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। उत्तर प्रदेश जो कभी बीमारू राज्य कहा जाता था, आज एक्सप्रेसवे वाले राज्य के रूप में अपनी नई पहचान बना चुका है। आजमगढ़ जैसे जिले, जिनका नाम लेने से लोग डरते थे, आज विकास की धारा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।” गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे की कुल लंबाई 91.35 किमी है और इसका निर्माण ₹7,283 करोड़ की लागत से हुआ है, जिसमें भूमि अधिग्रहण की राशि भी शामिल है। यह एक्सप्रेसवे गोरखपुर जिले के जैतपुर गांव (एनएच-27) से शुरू होकर आजमगढ़ के सालारपुर में पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से जुड़ता है। इसके जरिये अंबेडकर नगर और संत कबीर नगर जैसे जिले भी विकास के मार्ग से सीधे तौर पर जुड़ गए हैं।
पूर्वांचल से दिल्ली-एनसीआर की दूरी तीन घंटे हुई कम
मुख्यमंत्री ने इस मौके पर पिक्चर गैलरी का भी दौरा किया और परियोजना की तकनीकी जानकारियों को समझा। उन्होंने कहा कि इस एक्सप्रेसवे के बनने से पूर्वांचल से दिल्ली-एनसीआर तक की दूरी तीन घंटे कम हो जाएगी, जबकि गोरखपुर से लखनऊ की यात्रा अब केवल साढ़े तीन घंटे में पूरी की जा सकेगी।
इसके अलावा एक्सप्रेसवे के दोनों किनारों पर औद्योगिक क्षेत्रों, लॉजिस्टिक्स हब, और वाणिज्यिक परियोजनाओं के लिए ज़मीन चिह्नित की गई है। इससे न केवल क्षेत्रीय औद्योगिक विकास को बल मिलेगा बल्कि स्थानीय युवाओं को रोजगार के नए अवसर भी प्राप्त होंगे। मुख्यमंत्री योगी ने इस परियोजना को “पूर्वांचल की रीढ़” बताते हुए कहा कि इससे न केवल भौगोलिक दूरी कम होगी बल्कि आर्थिक, सामाजिक और औद्योगिक विकास को भी नया आयाम मिलेगा। उन्होंने जनता से अपील की कि वे इस एक्सप्रेसवे का उपयोग करें और क्षेत्रीय प्रगति में सक्रिय भागीदार बनें। गौरतलब है कि यह एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश सरकार की उस रणनीति का हिस्सा है, जिसमें सार्वजनिक अवसंरचना के माध्यम से गति, गतिशीलता और निवेश को एकीकृत कर राज्य को विकास के रास्ते पर अग्रसर किया जा रहा है।




