पुराना है कनाडा सरकार और खालिस्तान समर्थक आतंकियों के बीच प्रेम,
इंदिरा गांधी ने भी दिया था ट्रूडो के पिता पियरे को कड़ा जवाब
खालिस्तान समर्थक आतंकियों और कनाडा सरकार के बीच जुगलबंदी किसी से छुपी नहीं है। कनाडा सरकार की ओर से पिछले कई वर्षों से खालिस्तान समर्थक आतंकवादियों की मदद की जाती रही है। इसके साथ ही भारत के हितों की अनदेखी है। खालिस्तान प्रेम में न सिर्फ कनाडा सरकार ने भारतीयों की जान ली है, बल्कि दुनिया के दूसरे कई देशों के कई नागरिकों की भी जान ली है। ये सब कनाडा के रहवासियों ने नहीं बल्कि कनाडा के मौजूदा प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो और उनके पिता का किया धरा है।
बता दे की 23 जून 1985 को कनिष्क विमान में सवार 86 बच्चों समेत 329 लोगों की मौत की जिम्मेदार आतंकियों ने कनाडा में शरण ली थी और कनाडा की तत्कालीन सरकार ने उन्हें अपने यहां शरण दी 329 लोगों की हत्या का आरोप खालिस्तानी आतंकवादियों पर लगे दरअसल इस आतंकी घटना को ऑपरेशन ब्लू स्टार का जवाब माना गया, अक्सर मानव अधिकारों का ढिंढोरा पीटने वाला कनाडा और उसकी सरकार अब तक इस आतंकी घटना में न तो किसी आरोपी को सजा दिलवा सकी है और न ही इसकी जांच पूरी की गई भारत की तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी की ओर से भी इस तरह के आतंकवादी खतरे की चेतावनी तब कनाडा के तत्कालीन पीएम और मौजूदा प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के पिता पियरे ट्रूडो को दी थी लेकिन तब भी
ट्रूडो के पिता ने इस मामले को अनदेखा किया। अब कनाडा के PM जस्टिन ट्रूडो ने भारत सरकार के एजेंट्स पर कनाडा में खुफिया जानकारी जुटाने के साथ टारगेट किलिंग और कनाडा के लोगों को धमकाने ही नहीं हिंसा में शामिल होने का भी गंभीर आरोप लगाया है।
ट्रूडो सरकार का भारत विरोधी रवैया
भारतीय विदेश मंत्रालय का बयान
ट्रूडो मंत्रिमंडल में भारत विरोधी तत्वों को जगह
अलगाववादी विचारधारा के समर्थन में ट्रूडो सरकार
कनाडा से उच्चायुक्त वापस बुलाने का किया भारत ने फैसला
चरमपंथियों और आतंकवादियों को कनाडा में दी शरण
भारतीय राजनयिक और नेताओं को धमकाने वालों को दी शरण
आतंकियों संगठितियां अपराध सरगनाओ का नहीं किया प्रत्यर्पण
रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस RCMP के सबूतों का हवाला देते हुए प्रधानमंत्री ट्रूडो ने दावा किया था कि कनाडा से निकाले गए भारत सरकार के 6 एजेंट्स कनाडा में इन सभी गतिविधियों में शामिल थे यह कदम कनाडा में सार्वजनिक सुरक्षा के लिए खतरा हैं।कनाडा के प्रधानमंत्री ट्रूडो का यह भी कहना है कि कनाडा ने इन मामलों को लेकर भारत सरकार के साथ काम करने की कई बार कोशिशें कीं। लेकिन भारत की ओर से हर बार मदद करने से इनकार कर दिया। बता दें की यह पूरा मामला कनाडा की ट्रूडो सरकार की ओर से भेजी एक चिट्ठी के बाद गरमाया। इस
चिट्ठी में भारतीय हाई कमिश्नर और कुछ दूसरे डिप्लोमैट्स पर कनाडाई नागरिक की हत्या के मामले में संदिग्ध बताया गया था। इस तरह के आरोप लगाने के बाद कनाडा ने भारत के 6 डिप्लोमैट्स को कनाडा छोड़कर जाने के लिए कहा था। जिसके जवाब में भारत सरकार ने भी कनाडा के कार्यकारी हाई कमिश्नर स्टीवर्ट रॉस व्हीलर के साथ ही 6 कनाडाई डिप्लोमैट्स को देश छोड़ने के आदेश दिए हैं।
भारत कनाडा के बीच तनाव की वजह
खालिस्तानी आतंकी निज्जर की पिछले साल हत्या हुई थी। 18 जून 2023 को कनाडा के सरे शहर के एक गुरुद्वारे से बाहर निकलते वक़्त निज्जर की गोली मारकर हत्या कर दी थी। कनाडा के PM ट्रूडो ने पिछले साल 18 सितंबर को भी भारत सरकार पर निज्जर की हत्या काण्ड में शामिल होने का आरोप लगाया था। भारत ने कनाडा के प्रधानमंत्री का आरोप खारिज किया था। इसके बाद 3 मई 2024 को निज्जर की हत्या के तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया था। ये तीनों आरोपी भारत के रहने वाले हैं। कनाडाई पुलिस की ओर से कहा गया था कि इन पर पुलिस कई महीनों से नजर रखे थी। उन्हें यकीन है कि इन्हें भारत की ओर से निज्जर की हत्या करने का काम सौंपा था। तब भी भारत ने इस मामले को लेकर कहा था कि यह कनाडा का आंतरिक मामला है।।





