चौथे चरण का मतदान जारी….दांव पर पांच केन्द्रीय मंत्री और दो क्रिकेटर की प्रतिष्ठा…मतदाता करेंगे भाग्य का फैसला
लोकसभा का चुनाव अब चौथे चरण में प्रवेश कर गया है। चौथे चरण में आज हो रहे मतदान में कई दिग्गज नेताओं की राजनीतिक प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। जहां इस चौथे चरण में पांच केंद्रीय मंत्रियों के भाग्य का फैसला भी आज मंगलवार को इवीएम में कैद होगा। खासतौर पर पश्चिम बंगाल की दो लोकसभा सीटों से दो क्रिकेटर भी चुनाव मैदान में हैं। वहीं यूपी के पूर्व सीएम और सपा प्रमुख अखिलेश यादव कन्नौज लोकसभा सीट से 12 साल बाद चुनाव लड़ रहे हैं। उनके सामने बीजेपी के मौजूदा सांसद सुब्रत पाठक हैं।
लोकसभा चुनाव का चौथा चरण
10 राज्यों की 96 लोकसभा सीटों पर मतदान जारी
चौथे चरण की 96 सीटें कभी थीं कांग्रेस का गढ़
कांग्रेस का गढ़ मानी जाती थी यह सीटें
तीन चुनावों में लगातार गिरता गया कांग्रेस का ग्राफ
बीजेपी की चार गुना से भी ज्यादा बढ़ीं सीटें
आज जिन 10 राज्यों के 96 सीटों पर मतदान हो रहा है। वहां 2009 के आम चुनावों तक कांग्रेस का दबदवा कायम था। आंकड़ों पर गौर करें तो 2009 में कांग्रेस ने इन राज्यों में लोकसभा की 85 सीटों पर चुनाव मैदान में उतरी थी। इस चुनाव में कांग्रेस ने अपने सभी विरोधियों को पछाड़ते हुए 85 में 50 सीट पर जीतकर रिकॉर्ड बनाया लिया था। ऐसे में चौथे चरण में 96 लोकसभा सीटों पर हो रहे मतदान में इस बार सियासी विरासत बचाने का भी राजनीतिक दलों पर बड़ा दारोमदार है। क्योंकि यह सीट कभी कांग्रेस पार्टी का का गढ़ हुआ करती थीं। लेकिन पिछले तीन लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने चार गुना से अधिक सीटों पर कब्जा कर अपना दबदबा बना लिया है। वहीं पिछले तीन चुनाव में कांग्रेस अपने ही गढ़ में अर्श से फर्श पर जा पहुंची है।
सियासी मैदान में चौथे चरण में 1718 उम्मीदवार
2009 तक था इन सीटों पर कांग्रेस का जलवा
2009 में कांग्रेस ने 85 सीटों पर लड़ा था चुनाव
कांग्रेस ने 10 राज्यों की 85 में से जीती थीं 50 सीटें
2014 के चुनाव में 10 राज्यों की 96 सीटों पर बिगड़े समीकरण
कांग्रेस पार्टी 47 सीटें हार गई
2009 की तुलना में कांग्रेस ने 2014 में तीन सीटें जीती
2019 में के चुनाव में भी कांग्रेस का प्रदर्शन नहीं सुधरा
85 सीटों पर चुनाव लड़ा जीती महज छह सीटें
चुनाव आयोग के आंकड़े पर गौर करें तो पिछले तीन चुनावों में कांग्रेस इन 996 सीटों में से कभी 50 सीट जीतने वाली कांग्रेस अब सिमट कर छह सीटों पर ठहर गई है। सियासी जानकारों की माने तो इस चौथे चरण के मतदान में क्षेत्रीय दलों की सियासत में विरासत बचाने की बड़ी परीक्षा भी हो रही है। जिसमें उत्तरप्रदेश से लेकर आंध्र प्रदेश और तेलंगाना समेत बिहार के सियासी दलों की प्रतिष्ठा भी यहां दांव पर लगी है। क्षेत्रीय पार्टियों में टीएमसी, जेडीयू, राजद और समाजवादी पार्टी समेत बीआरएस और वाईएसआर जैसी पार्टियों को अपना प्रदर्शन सुधारते हुए खुद को मजबूत करने की चुनौती है।
आंध्र प्रदेश की 25 सीटें, तेलंगाना 17 सीटें
उत्तर प्रदेश की 13 सीटें, महाराष्ट्र की 11
पश्चिम बंगाल की 8 और मध्यप्रदेश की 8 सीट
उड़ीसा की 4, झारखंड की 4 बिहार की 5 सीट
जम्मू कश्मीर की 1 सीट पर मतदान हो रहा है
उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव
हैदराबाद से एआइएमआइएम के चीफ असदुद्दीन ओवैसी
लखीमपुर खीरी से केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा टेनी
पश्चिम बंगाल की बहरामपुर से अधीर रंजन चौधरी
पश्चिम बंगाल से ही महुआ मोइत्रा
आसनसोल से अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा चुनावी मैदान में हैं
बीजेपी ने कायम किया कांग्रेस की जमीन पर कब्जा
पिछले तीन चुनावों में कांग्रेस का ग्राफ जैसे जैसे गिरता रहा बीजेपी का ग्राफ वैसे-वैसे ही ऊपर उठता रहा। 2009 में भाजपा ने 89 सीटों पर चुनाव लड़ा था। इस चुनाव में भाजपा महज दस सीटों पर ही चुनाव जीत सकी थी। जबकि 2014 में भाजपा इतनी ही सीटों पर चुनाव मैदान में उतरी थी और उसने 38 सीट पर जीत दर्ज की थी। इसके बाद भाजपा ने 2019 में इन 89 सीट में से अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए 42 सीटें जीत लीं। चुनावी आंकड़े बताते हैं कि पिछले तीन चुनाव में भाजपा जहां 10 सीटों से चार गुना अधिक सीटें जीतते हुए 42 के अंक तक पहुंच गई वहीं कांग्रेस इस दौरान 50 सीट से सिमट कर 6 पर पहुंच गई।





