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क्या ‘ONION’ बिगाड़ सकती है ‘ओपिनियन’ ,पहले भी कई सरकारों को हिला चुकी है ये प्याज… इंदिरा जी ने भी पहनी थी प्याज की माला

DigitalDesk by DigitalDesk
October 31, 2023
in दिल्ली, मुख्य समाचार, स्पेशल
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कुछ महीनों तक सब्जी बाजार में उपेक्षित रहने वाली प्याज चुनावी मौसम में अचानक खास हो गई है। अक्सर दिवाली से पहले अचानक प्याज की सुर्खी बढ़ जाती है। मध्यप्रदेश सहित पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव की सरगर्मी बढ़ती जा रही है। चुनावी सीजन में प्याज के बढ़ते दाम जहां आमजन को झटका दे रहे हैं। वहीं सत्ताधारी दल की आंख से आंसू निकाल रहे हैं। दीपावली से पहले प्याज की कीमतें ग्राहकों की जेब पर भारी पड़ रही हैं। चुनावी सीजन पर इस महगांई का वोटर्स पर सीधा असर पड़ सकता है। मध्यप्रदेश में भी प्याज की बढ़ती की कीमतों ने सियासत भी गरमा दी है। एक सप्ताह पहले तक 35 से 40 रुपये तक बिकने वाला प्याज शतक लगाने की ओर बढ़ रही है। ऐसे में कांग्रेस इसे सियासी मुद्दा बनाते हुए बीजेपी पर हलावर नजर आ रही है तो वहीं बीजेपी पलटवार करते हुए कांग्रेस सरकार के दिनों की याद दिलाई। वहीं प्याज के थोक विक्रेता का कहना है नई प्याज नही आने से पुरानी प्याज के भाव बढ़ गए हैं। मंडी में प्याज का थोक भाव करीब 70 रुपये किलो पर पहुंच गया है। तो वही खेरची भाव प्याज की गुणवत्ता पर निर्भर है। यानी 80 रुपए प्रति किलो बाजार में प्याज बाजार में बिक रही है।

  • रुला रहे प्याज के बढ़ते दाम
  • बढ़ती कीमतों ने बिगाड़ा रसोई का बजट
  • प्याज के दाम पर होने लगी सियासत
  • 1980 में प्याज ने बनाई थी इंदिरा गांधी की सरकार
  • प्याज ने 1998 में गिराई थी दिल्ली की सरकार
  • 1998 में चली गई थी सुषमा स्वराज की सरकार
  • 2014 के​ दिल्ली विधानसभा चुनाव में ​हार गई थी दीक्षित सरकार

प्याज से पहले लाल हुआ था टमाटर

पिछले एक सप्ताह में प्याज के दाम में जबरदस्त उछाल देखने को मिला है। इंदौर में अच्छी क्वालिटी का प्याज खुले बाजार में 70 से 80 रुपये किलो बिक रहा है। यानी जो प्याज सप्ताह भर पहले आम था, वही प्याज अब खास हो गया है। पहले टमाटर के दाम सुर्ख हुए थे। आम जनमानस की पहुंच से टमाटर बाहर हुआ था,फिर उसका मिजाज ठंडा हुआ। टमाटर अब अर्श से फर्श पर आ चुका है, लेकिन चुनावी मौका है तो प्याज भी कहां पीछे रहने वाली थी। मध्यप्रदेश में 17 नवंबर को मतदान होा है। ऐसे में देखना होगा कि प्याज के दाम कितनी ऊंचाई तक बढ़ते हैं। क्या प्याज की ये बढ़ती कीमतें मतदाताओं के ओपिनियन को प्रभावित करेंगी। जहां पोहे की दुकानों पर सर्द मौसम में आने वाली मूली ने दस्तक दे दी वहीं प्याज थोड़ी मात्रा में दिया जाने लगा और तो और होटलों में भी सलाद में नामामात्र की प्याज दिखाई दे रही है।
ऐसे में प्याज के बढ़ते दामों ने सियासत भी गरमा दी है। विपक्षी दल कांग्रेस ने महंगाई के इसे चुनाव मुद्दा बना लिया है। बता दें इतिहास गवाह है प्याज के दामों में जब जब वृद्धि हुई है उसके असर से सरकार भी हिल गईं हैं। चुनावी सीजन हैं, कहीं प्याज के ये बढ़ते दाम सत्ताधारी दल के लिए सिरदर्द न बन जाएं।

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विपक्ष इस तरह निकाल रहा प्याज के छिलके

प्याज के दाम को लेकर विपक्षी दल कांग्रेस ने सरकार पर निशाना साधा है। रविवार को मीडिया की नियमित ब्रिफिंग के दौरान कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता रागिनी नायक ने प्याज के बढ़ते दामों के विररोध में
प्याज की माला पहनकर प्रदर्शन किया। रागिनी एक ग्रहणी भी हैं ऐसे में उन्होंने प्याज के बढ़ते दाम से लोगों को हो रही परेशानियों को लेकर बीजेपी की केंद्र ही नहीं और मध्य प्रदेश की सरकार पर भी निशाना साधा और कहा प्याज के दाम बढ़कर 80 रुपये प्रति किलोग्राम हो गये हैं। अभी कुछ दिन पहले ही टमाटर के भाव 200-250 रुपये प्रति किलोग्राम हो गये थे। सीएम शिवराज सिंह चौहान ये बताएं कि प्याज का मूल्य लोगों के लिए परेशानी क्यों खड़ा कर रहा है। उन्होंने महंगाई पर भी बात की और कहा एक साल में मध्य प्रदेश में गेहूं का आटा 35 प्रतिशत महंगा हो गया। खाद्य तेल के दाम भी पिछले तीन साल के दौरान दोगुना हो गये। अब तो बच्चों के मुंह से दूध भी छिन गया है। दुध के साथ घी और पनीर पर वस्तु, सेवा कर लगाया गया।

पहले भी कई बार प्याज हिला चुकी है सरकार

हिंदी भाषी मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ के साथ मिजोरम और तेलंगाना में विधानसभा चुनाव की सरगर्मी बढ़ गई है। 7 नवंबर को जहां छत्तीसगढ़ में पहले चरण का मतदान है तो वहीं 17 नवंबर को छत्तीसगढ़ के साथ मध्यप्रदेश में भी वोटिंग होगी, जबकि राजस्थान में 25 नवंबर को मतदान होगा। लेकिन इससे पहले प्याज का महंगा होना सत्तारूढ़ पार्टियों की आंखों से आंसू निकाल सकता है। उपभोक्ता मंत्रालय की वेबसाइट में दी गई जानकारी के मुताबिक देश में 29 अक्टूबर को प्याज के अधिकतम औसत दाम 83 रुपये किलो पर पहुंच गये हैं। कई शहर ऐसे हैं जहां प्याज के खुदरा दाम 100 रुपये प्रति किलो के पार चले गये हैं।

प्याज का इलेक्शन से है गहरा कनेक्शन

प्याज का इलेक्शन से क्या कनेक्शन है। बढ़ती महंगाई के बीच प्याज के दाम अब तक किन सरकारों को हिला चुका है ये देखते हैं। प्याज ने कई बार सरकारों की नींव हिला दी है। दिल्ली में कई पार्टियां सत्ता में रहते हुए प्याज का रुतबा देख चुकी हैं। बात करें साल 1998 की तो उस समय भाजपा को दिल्ली राज्य की सत्ता से हाथ धोना पड़ा था। तब दिल्ली में प्याज के दाम 60 रुपये किलो तक पहुंच चुके थे।

कभी मनोज तिवारी ने गाया था ये गाना

दिल्ली में बीजेपी के अध्यक्ष रह चुके मनोज तिवारी 1998 के आसपास एक गायक के रूप में तेजी से उभर रहे थे। उसी दौर में जब प्याज महंगा हुआ तो उनका गाया गाना का हो अटल चाचा पियजवे अनार हो गईल ने काफी सुर्खियां बटोरीं थी। तब दिल्ली विधानसभा के चुनाव से पहले प्याज की बढ़ती कीमतें मुद्दा बनीं तो बीजेपी ने दिल्ली के तत्कालीन सीएम साहिब सिंह वर्मा को हटाया था। इसके बाद सीएम की कमान सुषमा स्वराज को सौंपी। लेकिन महंगाई और प्याज के बढ़ते दाम के आगे उनकी एक नहीं सुनी गई और सरकार चली गई। विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने प्याज के बढ़ते दाम को मुद्दा बनाया और सरकार बना ली। उस दौर में शीला दीक्षित को दिल्ली का सीएम बनाया गया था।

सत्ता दिलाई और सत्ता छीन भी ली

जिस प्याज ने 1998 में कांग्रेस को दिल्ली की सत्ता दिलाई थी उसी प्याज ने साल 2013 में हुए चुनाव में कांग्रेस को रुला दिया। अक्टूबर 2013 में जब प्याज की कीमतें बढ़ी और विपक्ष ने भ्रष्टाचार के साथ महंगाई , प्याज के बढ़ते दामों का मुद्दा चुनाव में उछला तो यही प्याज सत्ता के बदलाव की साक्षी बनी। 2013 में महंगाई के मुद्दे पर लड़ी आम आदमी पार्टी ने दिल्ली में सरकार बनाई थी।

1980 में प्याज ने बनाई थी इंदिरा गांधी की सरकार

आपातकाल के बाद जनता पार्टी ने देश की सत्ता संभाली थी। लेकिन जनता पार्टी सरकार अपने ही अंतर्विरोधों के चलते लड़खड़ाती रही थी। सत्ता से बाहर हुईं इंदिरा गांधी के पास उस समय कोई बड़ा चुनावी मुद्दा हाथ में नहीं था। लेकिन तभी अचानक प्याज के दामों में बढ़ौत्री होने लगी और इंदिरा गांधी को चुनाव में एक बड़ा मुद्दा मिल गया। तत्कालीन प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की सरकार पर इंदिरा गांधी ने
प्याज के दाम पर नियंत्रण रखने में नाकाम होने का आरोप लगाया। साल 1980 के आम चुनाव में प्याज की बढ़ती कीमत और महंगाई को चुनावी मुद्दा बनाकर इंदिरा गांधी ने जीत हासिल की थी। वे दोबारा सत्ता में आईं थी। हालांकि अब भी कहा जाता है कि उस दौर में जनता पार्टी की सरकार भले ही अपनी उलझनों और अंतर्विरोधों की वजहों से गिरी हो, लेकिन कांग्रेस को उसके बाद हुए चुनाव में प्याज ने जीत दिलाई थी।

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Tags: Assembly elections in five statesinflation issuerising onion prices
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