पूर्वोत्तर राज्य सिक्किम में बाढ़ ने तबाही मचा दी है। बादल फटने के बाद आई बाढ़ से जानमाल का काफी नुकसान हुआ है। सिक्किम के साथ ही यह बाढ़ पश्चिम बंगाल के लिए भी मुसबत साबित हो रही है। बाढ़ की चपेट में आकर मौत का शिकार बनने वाले लोगों की संख्या बढ़कर 56 हो गई है। इनमें 26 शव सिक्किम और 25 शव पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले के विभिन्न क्षेत्रों से मिले हैं। मृतकों में 11 सैन्यकर्मी भी शामिल हैं। वहीं करीब 142 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं तो घायलों की संख्या भी बढ़कर 26 हो गई है।
- सिक्किम में बाढ़ का प्रकोप
- कम से कम 56 व्यक्तियों की गई जान
- बाढ़ के चलते 100 से अधिक लोग लापता
- पूर्व चेतावनी संकेतों के बिना नहीं हुई बारिश
- बाढ़ के कारण मरने वालों की संख्या हुई 56
- 26 शव सिक्किम में और पश्चिम बंगाल के 25 शव
- जलपाईगुड़ी जिले के विभिन्न इलाकों में पाए गए शव
- मृतकों में 11 सेना के जवान भी शामिल
- सिक्किम में फंसे तीन हजार पर्यटक
- 1200 मेगावाट बिजली पैदा करने वाला चुंगथांग बांध बहा
- तीस्ता नदी पर बना था चुंगथांग
- करीब 25 हजार करोड़ रुपये थी बांध की लागत
हर तरफ तबाही का मंजर
बाढ़ के बाद सिक्किम में गंगटोक से लेकर दूरदराज स्थित कई कस्बों में हर तरफ तबाही का मंजर दिखाई दे रहा है। कई भारी-भरकम गाड़ियां ही नहीं मशीनें भी बाढ़ के बाद मलबे में दबी हैं। कई मकान बाढ़ में दफन हो गए तो गाड़ियां मलबे में दबी हुईं हैं। कहीं पुल और सड़कें ही साफ हो गई। उत्तर सिक्किम में जबाही का सबसे ज्यादा असर देखने को मिला है। बाढ़ के चलते सिक्किम में सैकड़ों लोगों को राहत शिविर पनाह लेना पड़ रही है। इस बीच राज्य सरकार ने कहा कि बचाव अभियान जारी था लेकिन खराब मौसम और क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे के कारण प्रक्रिया धीमी हो गई।
आपदा से 22,000 से अधिक लोग प्रभावित
दैविय आपदा से 22,000 से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं। सिक्किम के विभिन्न हिस्सों में विदेशी सहित लगभग 3,000 पर्यटक फंसे हुए हैं। सिक्किम को शेष भारत से जोड़ने वाली प्रमुख सड़क एनएच-10 को नुकसान हुआ है। इससे बचाव एवं राहत प्रयासों में बाधा आ सकती है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक अब तक 2,011 लोगों को बचाया जा चुका है। आपदा से प्रभावित लोगों को राज्य में राहत शिविरों में ले जाया गया है। फिलहाल सेना, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, सिक्किम पुलिस समेत राज्य सरकार के कई विभागों की टीमें लापता लोगों की तलाश और बचाव में जुटी हैं। इस बाढ़ से 1200 मेगावाट बिजली पैदा करने वाला तीस्ता नदी पर बना चुंगथांग बांध बह गया। जिसकी निवेश लागत करीब 25 हजार करोड़ रुपये थी।
आपदा ने अप्रत्याशित रूप से हमला किया
लेकिन आपदा अप्रत्याशित रूप से नहीं आई। पिछले एक दशक में, सरकारी एजेंसियों और शोधकर्ताओं ने सिक्किम में विनाशकारी हिमनदी झील के विस्फोट के खतरे के बारे में बार-बार अलर्ट जारी किया था। सबसे हालिया चेतावनी उत्तरी सिक्किम में ल्होनक झील से संबंधित 2021 में जारी की गई थी, लेकिन दुर्भाग्य से, इन सभी चेतावनियों को अनसुना कर दिया गया। फिर एक दुर्भाग्यपूर्ण बुधवार को आपदा आ गई। संभवतः झील के ऊपर बादल फट गया। जिससे तीस्ता नदी बेसिन में अचानक बाढ़ आ गई। इस विनाशकारी घटना का गहरा प्रभाव पड़ा। जिससे 22 हजार से अधिक लोगों का जीवन प्रभावित हुआ।
हिमानी झील में विस्फोट से आई बाढ़
सिक्किम जैसे क्षेत्रों में ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (जीएलओएफ) एक महत्वपूर्ण चिंता का विषय है, जहां स्थलाकृति और जलवायु ऐसी संभावित खतरनाक झीलों के निर्माण में योगदान करती है। दक्षिण लहोनक झील सिक्किम के सुदूर उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र में समुद्र तल से 5,200 मीटर (17,100 फीट) की ऊंचाई पर स्थित है। यह झील मुख्य रूप से लोनाक ग्लेशियर के पिघलने के कारण बनी है। इस तरह की हिमनद झीलें ग्लोबल वार्मिंग के कारण बढ़ते तापमान के कारण ग्लेशियरों के पीछे हटने से बनती हैं और वे महत्वपूर्ण खतरे पैदा कर सकती हैं क्योंकि उनमें बड़ी मात्रा में पानी जमा होता है।





