इन दिनों देश में समान नागरिक संहिता को लेकर बहस छिड़ी हुई है। सरकार इसे हर हाल में लागू करने पर उतारु है जबकि विपक्षी दल इसके विरोध में खड़ा हो गया है। कांग्रेस,आरजेडी और ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड जैसे कई कई राजनैतिक संगठनों ने यूसीसी की खिलाफत करना शुरु कर दिया है। ऐसे में सवाल उठता है कि समान नागरिक संहिता यानी यूसीसी लागू होने पर किस तरह के बदलाव होंगे।
इसलिए हो रहा है विरोध
कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल का कहना है कि पीएम मोदी को पहले देश में गरीबी,महंगाई, बेरोजगारी और मणिपुर हिंसा पर जवाब देना चाहिए। उन्होंने कहा कि यूसीसी लाकर केंद्र सरकार देश का ध्यान भटकाना चाहती है। वहीं छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल का कहना है कि भाजपा हमेशा हिंदू मुस्लिम की नजर से सोचती है। यहां आदिवासी हैं उनकी अपनी परंपराएं हैं उनका क्या होगा। इधर आरजेडी नेता मनोज झा का कहना है कि सिर्फ हिंदू मुस्लिम का मसला नहीं है इसमें हिंदुओं के बीच भी कई ऐसे नियम है जिनको लेकर दिक्कतें हो सकतीं हैं। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड भी समान नागरिक संहिता के विरोध में है। बोर्ड के सदस्य खालिद रशीदी फिरंगी महली का कहना है कि यूनिफॉर्म सिविल कोड आने से सिर्फ मुसलमानों को नहीं बल्कि अन्य धर्म के लोगों को भी नुकसान है। इसके अलावा लगभग तीन दर्जन आदिवासी संगठन भी इस कानून का विरोध कर रहे हैं उन्हे डर है कि कहीं उनकी परंपराओं पर संकट खड़ा न हो जाए।
समान नागरिक संहिता से इस तरह होगा बदलाव
देश में हिंदू,सिख,जैन और बौध्द के अपने पर्सनल मामले हिंदू मैरिज एक्ट से चलते हैं जबकि मुसलमानों, ईसाइयों और पारसियों के अलग पर्सनल लॉ हैं। ऐसे में यूसीसी लागू होती है तो सभी धर्मो के अपने नियम कानून निरस्त हो जाएंगे। जिसमें शादी,तलाक,गोद लेने के अलावा उत्तराधिका और संपत्ति से जुड़े मामलों का निराकरण भी यूसीसी के तहत ही होगा। इसी तरह हिंदू,सिख,ईसाई और बौध्द पारसी के अलावा जैन धर्म में एक ही विवाह की अनुमति है। दूसरी शादी के लिए पहली पत्नी या पति से तलाक हो चुका हो या फिर मृत्यू हो गई हो। तभी दूसरा विवाह किया जा सकता है।वहीं दूसरी तरफ मुस्लिमों में पुरुषों को चार निकाह करने की अनुमति है। यूसीसी आने पर इस तरह चार चार निकाह पर प्रतिबंध लग जाएगा। इसी तरह हिंदू सहित कई धर्मो में तलाक को लेकर अलग अलग नियम हैं। तलाक के लिए हिंदुओं को 6 माह तो ईसाईयों को दो साल तक अलग अलग रहना पड़ता है जबकि मुस्लिमों में तलाक का अलग नियम है यूसीसी आने पर इस पर रोक लग जाएगी।
गोद लेने और संपत्ति के अधिकार
कुछ धर्मों के पर्सनल लॉ महिलाओं को बच्चा गोद लेने से रोकते हैं। मसलन, मुस्लिम महिलाएं बच्चा गोद नहीं ले सकतीं। लेकिन हिंदू महिला बच्चा गोद ले सकती है। यूसीसी आने से सभी महिलाओं को बच्चा गोद लेने का अधिकार मिल जाएगा। इसी तरह हिंदू लड़कियों को तो अपने माता-पिता की संपत्ति में बराबर का हक है। लेकिन पारसी लड़की अगर दूसरे धर्म के पुरुष से शादी करती है तो उसे संपत्ति से बेदखल कर दिया जाता है। यूसीसी आने से सभी धर्मों में उत्तराधिकार और संपत्ति के बंटवारे से जुड़ा एक ही कानून होगा।
प्रकाश कुमार पांडेय





