दुनिया में आज LGBTQ समुदाय के लोगों को लेकर चारों तरफ चर्चाएं चल रही है. भारत में भी इस कम्युनिटी के लोग अपने अधिकारों के लिए लड़ रहे है. जून का महीना चल रहा है , जिसे प्राइड मंथ के नाम से जाना जाता है. यह महीना इन लोगों को ही समर्पित होता है. अब लड़का लड़की होना तो कुदरत पर निर्भर करता है, लेकिन आज के समय में मेडिकल साइंस ने इतनी उन्नति कर ली है कि आप सर्जरी के जरिए अपना जेंडर बदलवा सकते है.दअसल कई लोग ऐसे होते है जो पैदा किसी और जेंडर में होते है , लेकिन एक समय बाद उन्हें अपोजिट जेंडर जैसा फील होने लगता है जिसके चलते वे अपना जेंडर चेंज करवाते है. लेकिन अगर हम कहे है दुनिया में एक ऐसा गांव भी है जहां अपने आप लड़कियां लड़को में बदलने लगती है. जी हां सोचने में थोड़ा अजीब लग रहा होगा, लेकिन ये सच है. डोमिनिकन रिपब्लिक देश में ला सेलिनास नाम का एक गांव है जिसमें एक खास उम्र के बाद लड़कियों का जेंडर चेंज हो जाता है. कैसे होता है, इस बारे में आज तक वैज्ञानिक भी पता नहीं लगा पाएं है. लड़कियों के लड़को में बदल जाने के कारण कई लोग तो गांव को श्रापित भी मानते है.
12 साल के बाद शुरू हो जाता है जेंडर चेंज
गांव में लड़कियों की उम्र जैसे ही 12 साल पार करती है वैसे ही वे लड़कों में तब्दील होना शुरू हो जाती हैं. इस तरह के बच्चों को डोमिनिकन रिपब्लिक में ‘ग्वेदोचे’ कहा जाता है, जिसका स्थानीय भाषा में मतलब किन्नर होता हैं. गांव के लोग इसी कारण अपने घर में बेटी होने से डरते है. बताया जाता है कि जिस घर में बेटी जन्म लेती है, उस घर में मातम जैसा माहौल हो जाता है. इस रहस्यमयी बीमारी के चलते आस पास के गांव के लोग भी गांव को बुरी नजर से देंखते है और गांव को श्रापित मानते हैं.
बीमारी है समस्या का कारण
वहीं गांव के लोगों से उलट डॉक्टरों का कहना है कि लड़कियों में ये बदलाव एक बीमारी के कारण आता है , जिसे ‘स्यूडोहोर्मैफ्रैडाइट’ कहा जाता है. यह एक अनुवांशिक बीमारी है. इस बीमारी के कारण लड़की के रूप में पैदा होने वाले बच्चों के अंग एक उम्र के बाद लड़कों के अंग में बदलने लगते है. सिर्फ अंग नहीं बल्कि लड़कियों की आवाज भी बदलने लगती है और उसमे भारीपन आ जाता है, जो धीरे धीरे उन्हें लड़की से लड़का बना देता है.
वैज्ञानिक भी है हैरान
ला सेलिनास नामक गांव व समुद्र किनारे बसा हुआ है जिसकी आबादी 6 हजार हैं.कई रिसर्चर्स और वैज्ञानिकों के लिए यह गांव शोध का विषय बना हुआ है. इस समस्या का इलाज ढूंढने की वैज्ञानिक लंबे समय से कोशिश कर रहे है, लेकिन वे अभी तक किसी कामयाब नहीं हो पाएं है.





