केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनधारियों के लिए 8वें वेतन आयोग को लेकर लंबे समय से चल रहा इंतजार अभी खत्म होता नहीं दिख रहा है। हालांकि सरकार की ओर से यह साफ कर दिया गया है कि आयोग का गठन पहले ही हो चुका है और इसकी प्रक्रिया तय कार्यक्रम के अनुसार आगे बढ़ रही है। हाल ही में राज्यसभा में दिए गए जवाब से आयोग की समयसीमा और कामकाज को लेकर स्थिति स्पष्ट हुई है।
3 नवंबर 2025 को जारी हुई थी अधिसूचना
सरकार ने संसद को जानकारी दी है कि 8वें वेतन आयोग का औपचारिक गठन पहले ही किया जा चुका है। इसकी अधिसूचना 3 नवंबर 2025 को जारी की गई थी। यह आयोग केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनधारियों से जुड़े अहम मुद्दों की समीक्षा करेगा। राज्यसभा में पूछे गए सवाल के जवाब में सरकार ने साफ किया कि आयोग को अपना काम शुरू करने के लिए सभी जरूरी प्रक्रियाएं पूरी कर ली गई हैं।
वेतन, भत्ते और पेंशन पर होगी समीक्षा
केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने सदन में बताया कि 8वें वेतन आयोग के दायरे में कर्मचारियों का वेतन ढांचा, विभिन्न भत्ते और पेंशन से जुड़ी शर्तें शामिल होंगी। आयोग इन सभी पहलुओं का विस्तृत अध्ययन करेगा और उसी आधार पर अपनी सिफारिशें तैयार करेगा। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि आयोग अपनी रिपोर्ट तय समयसीमा के भीतर प्रस्तुत करेगा।
रिपोर्ट के लिए 18 महीने का समय
सरकार के अनुसार, 8वें वेतन आयोग को अपनी रिपोर्ट सौंपने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है। इस गणना के अनुसार आयोग साल 2027 में सरकार को अपनी अंतिम रिपोर्ट देगा। रिपोर्ट आने के बाद ही सिफारिशों पर विचार किया जाएगा और फिर आगे की कार्रवाई तय होगी। इसका मतलब यह है कि कर्मचारियों को नई वेतन व्यवस्था के लिए अभी कुछ और समय तक इंतजार करना पड़ सकता है।
बजट पर असर और कर्मचारियों का आंदोलन
सांसदों ने यह सवाल भी उठाया कि आयोग की सिफारिशें लागू होने पर सरकार के बजट पर कितना अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। इस पर सरकार ने साफ कहा कि फिलहाल इसका सटीक अनुमान लगाना संभव नहीं है। वास्तविक वित्तीय असर आयोग की रिपोर्ट और उसकी मंजूरी के बाद ही आंका जा सकेगा।
इधर, कर्मचारियों के संगठनों ने भी दबाव बढ़ा दिया है। कन्फेडरेशन ऑफ सेंट्रल गवर्नमेंट एम्प्लॉइज एंड वर्कर्स (CCGEW) ने 12 फरवरी 2026 को देशव्यापी एक दिन की हड़ताल का ऐलान किया है। उनकी प्रमुख मांगों में 20% अंतरिम राहत, 50% महंगाई भत्ते को मूल वेतन में शामिल करना और एनपीएस खत्म कर पुरानी पेंशन योजना लागू करना शामिल है।





