भोपाल में 7वां विश्व रंग: इन देशों के कलाकारों का महाकुंभ..जानें इस बार क्या कुछ होगा खास
27 से 30 नवंबर तक राजधानी में एशिया का सबसे बड़ा सांस्कृतिक समागम
भोपाल एक बार फिर वैश्विक कला-संस्कृति का केंद्र बनने जा रहा है। 27 से 30 नवंबर तक रवींद्र भवन सभागार में होने जा रहे 7वें विश्व रंग में दुनिया के 70 देशों से आए कलाकार, साहित्यकार और संस्कृति प्रेमी शामिल होंगे। यह आयोजन भारतीय लोक कलाओं, संस्कृति, साहित्य और वैश्विक संवाद को समर्पित है।
एशिया का सबसे बड़ा सांस्कृतिक आयोजन
विश्व रंग के निदेशक संतोष चौबे के अनुसार कार्यक्रम की शुरुआत 15 देशों से हुई थी। अब 70 देशों तक विस्तार हो चुका है। 4 दिन में 90 सत्र होंगे। रवींद्र भवन के 10 मंचों पर समानांतर गतिविधियां होंगी। इस बार 21वीं सदी की चुनौतियों—साहित्य, संस्कृति, सामाजिकता, पर्यावरण और विकास—पर विशेष फोकस रहेगा।
सरकार की सहभागिता पहली बार
इस बार आयोजन में मध्य प्रदेश शासन भी सहभागी बनेगा। राज्यपाल मंगू भाई पटेल उद्घाटन करेंगे। इस मौके पर मॉरीशस के पूर्व राष्ट्रपति पृथ्वीराज सिंह रुपन मौजूद रहेंगे। विधान परिषद जैसे मानद पद पर कार्य करने वाले 6 रचनाकारों को विश्व रंग मानद अलंकरण दिया जाएगा।
कौन-कौन आ रहे हैं?
कार्यक्रम में शामिल होंगी देश-दुनिया की प्रमुख हस्तियां
फैजल मलिक, दिव्या दत्ता, स्वानंद किरकिरे, राधाकृष्ण पिल्लै, प्रिया मलिक, नीलोत्पल मृणाल, सौरभ द्विवेदी, देवदत्त पटनायक, सुमित अवस्थी, पुष्पेष पंत, साथ ही डॉ. नंदकिशोर आचार्य, ममता कालिया, शिवमूर्ति, अनामिका, मनीषा कुलश्रेष्ठ जैसे वरिष्ठ साहित्यकार।
27–30 नवंबर: क्या होगा खास?
27 नवंबर—शोभायमान शुरुआत श्रीकृष्ण लीला के भव्य मंचन से
श्रीराम कला केंद्र, नई दिल्ली की बड़ी टीम
लाइट एंड साउंड इफेक्ट्स के साथ
30 नवंबर (समापन)—महानाट्य “अहिल्या रूपेण संस्थिताश्”
अहिल्याबाई होल्कर के जीवन पर आधारित
नागपुर प्रयास रंग समूह के 50 से अधिक कलाकार
70 देशों का सहभाग
इन देशों के प्रतिनिधि शामिल होंगे
कनाडा, अमेरिका, बेल्जियम, नीदरलैंड, यूक्रेन, इटली, स्वीडन, यूके, रूस, जापान, इंडोनेशिया, नेपाल, ताजिकिस्तान, कतर, वियतनाम, साउथ अफ्रीका आदि। यूक्रेन के 8 विद्यार्थियों का दल हिंदी नाटक पेश करेगा, जो इस आयोजन का बड़ा आकर्षण है।
मानद अलंकरण पाने वाले 6 दिग्गज
ममता कालिया — हिन्दी
हरीश मीनाश्रु — गुजराती
चन्द्रभान खयाल — उर्दू
एच.एन. शिवप्रकाश — कन्नड़
लक्ष्मण गायकवाड़ — मराठी
परेश नरेन्द्र कामत — कांकणी
अलंकरण 27 नवंबर की शाम उद्घाटन समारोह में प्रदान किए जाएंगे।
जनजातीय विरासत का विशेष मंच
टंट्या भील सभागार में जनजातीय साहित्य और कला पर सत्र। दो हेरिटेज फिल्में — गणगौर गाथा और संजा। जनजातीय शिल्प और चित्रों की प्रदर्शनी। कठपुतली कला का प्रदर्शन। आगंतुकों के लिए पारंपरिक व्यंजनों की सौगात।





