77वां गणतंत्र दिवस: कर्तव्य पथ पर होगा भारत का शक्ति प्रदर्शन…दुश्मन के दांत खट्टे कर देंगे ये अत्याधुनिक हथियार

77th Republic Day India show of strength on the path of duty

77वां गणतंत्र दिवस: कर्तव्य पथ पर होगा भारत का शक्ति प्रदर्शन…दुश्मन के दांत खट्टे कर देंगे ये अत्याधुनिक हथियार

गणतंत्र दिवस के अवसर पर 26 जनवरी को भारत एक बार फिर दुनिया को अपनी सैन्य शक्ति, आत्मनिर्भरता और रणनीतिक तैयारी का स्पष्ट संदेश देने जा रहा है। कर्तव्य पथ पर निकलने वाली गणतंत्र दिवस परेड केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं होगी, बल्कि यह भारत की बदली हुई सैन्य सोच, स्वदेशी रक्षा तकनीक और भविष्य की युद्ध रणनीति का जीवंत प्रदर्शन बनेगी। इस बार परेड में ऐसे अत्याधुनिक हथियार और सिस्टम शामिल होंगे, जिन्होंने हालिया अभियानों में अपनी क्षमता साबित की है और जिनकी गूंज सीमापार तक सुनाई दे रही है।

गणतंत्र दिवस 26 जनवरी पर भारत अत्याधुनिक रक्षा तकनीकों के साथ स्वदेशी हथियारों के प्रदर्शन करने जा रहा है। जिसके जरिए दुश्मनों को चौंकाने की तैयारी की जा रही है। इस दौरान हाइपरसोनिक मिसाइलें, उन्नत ड्रोन के साथ ही काउंटर-ड्रोन सिस्टम को शामिल किया जाएगा। ताकि भारतीय सेना की बढ़ती ताकत और आत्मनिर्भरता का प्रदर्शन किया जा सके। साथ ही दुश्मन देशों को कड़ा संदेश भी दिया जा सके कि वे भारत की समुद्री और हवाई सीमाओं पर हमला करने की सोच भी न सकें।

भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना के समन्वित प्रदर्शन में यह साफ दिखेगा कि भारत अब केवल रक्षा करने वाला देश नहीं, बल्कि हर मोर्चे पर जवाब देने में सक्षम एक सशक्त सैन्य शक्ति है। स्वदेशी होवित्ज़र तोप से लेकर ब्रह्मोस मिसाइल, आकाश एयर डिफेंस सिस्टम और ड्रोन युद्ध तकनीक तक—हर प्रणाली भारत की बढ़ती आत्मनिर्भरता का प्रतीक है।

इस वर्ष की परेड का एक बड़ा आकर्षण ड्रोन शक्ति ‘ईगल प्रहार’ सिस्टम होगा। यह एक मोबाइल ड्रोन रिपेयर और मेंटेनेंस प्लेटफॉर्म है, जिसे युद्ध क्षेत्र में ही तैनात किया जा सकता है। पहले किसी ड्रोन के क्षतिग्रस्त होने पर उसे पीछे वर्कशॉप भेजना पड़ता था, जिससे वह लंबे समय तक ऑपरेशन से बाहर रहता था। लेकिन ‘ईगल प्रहार’ के आने से अब ड्रोन को मौके पर ही रिपेयर किया जा सकता है, जिससे समय की बचत होगी और युद्ध क्षमता लगातार बनी रहेगी। यह सिस्टम आधुनिक मैकेनाइज्ड फोर्सेस के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने में सक्षम है।

हवाई सुरक्षा के मोर्चे पर मीडियम रेंज सरफेस टू एयर मिसाइल (MR-SAM) और आकाश मिसाइल सिस्टम भारत की मजबूत ढाल बनकर उभरे हैं। MR-SAM, जिसे भारत और इज़राइल के सहयोग से विकसित किया गया है और अब काफी हद तक स्वदेशी बनाया जा चुका है, 70 किलोमीटर तक की दूरी पर दुश्मन के विमानों, मिसाइलों और ड्रोन को मार गिराने में सक्षम है। एक साथ कई लक्ष्यों को भेदने की इसकी क्षमता इसे बेहद घातक बनाती है। वहीं पूरी तरह स्वदेशी आकाश मिसाइल सिस्टम, 25–30 किलोमीटर की रेंज के साथ, सीमावर्ती इलाकों में दुश्मन के हवाई खतरों को नाकाम करने में अहम भूमिका निभा चुका है।

ड्रोन और लूटिंग म्यूनिशन के क्षेत्र में भारतीय सेना ने तेजी से खुद को अपग्रेड किया है। शक्तिबाण और दिव्यास्त्र जैसी नई रेजीमेंट्स तैयार की गई हैं, जिनके जवान अत्याधुनिक ड्रोन और आत्मघाती हथियारों से लैस होंगे। आने वाले समय में हर इन्फैंट्री बटालियन में ड्रोन प्लाटून की तैनाती की योजना है, जिससे निगरानी और सटीक हमला—दोनों क्षमताएं कई गुना बढ़ेंगी। ये ड्रोन ‘आईज इन द स्काई’ बनकर दुश्मन की हर हरकत पर नजर रखेंगे।

ऊंचे और दुर्गम इलाकों में ऑपरेशन के लिए तैयार किया गया रोबोटिक म्यूल भी इस बार परेड का हिस्सा होगा। यह हाईटेक रोबोटिक प्लेटफॉर्म पहाड़ी क्षेत्रों में रसद, मेडिकल सप्लाई और हथियार पहुंचाने में सक्षम है। थर्मल कैमरों, हथियार माउंट और लंबी रेंज की कम्युनिकेशन प्रणाली से लैस यह रोबोट सैनिकों की जान जोखिम में डाले बिना दुश्मन पर नजर रखने और जरूरत पड़ने पर जवाबी कार्रवाई करने में मदद करेगा।

गणतंत्र दिवस परेड की शान बनने वाली ब्रह्मोस मिसाइल भारत की मारक क्षमता का सबसे बड़ा प्रतीक मानी जाती है। सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस तीनों सेनाओं में शामिल है और जमीन, हवा तथा समुद्र—तीनों प्लेटफॉर्म से लॉन्च की जा सकती है। इसकी तेज रफ्तार और सटीकता ने इसे दुनिया की सबसे घातक मिसाइलों में शामिल कर दिया है। ऑपरेशनल अनुभवों के बाद अब इसकी रेंज बढ़ाने और हाइपरसोनिक संस्करण पर भी काम चल रहा है।

तोपखाने की बात करें तो स्वदेशी एडवांस्ड टोड आर्टिलरी गन सिस्टम (ATAGS) भारत की ‘मेक इन इंडिया’ पहल की बड़ी सफलता है। 155 मिमी कैलिबर की यह होवित्ज़र तोप करीब 40 किलोमीटर तक मार करने में सक्षम है और बोफोर्स जैसी पुरानी तोपों से कहीं ज्यादा आधुनिक है। इसके ऑटोमैटिक गन अलाइनमेंट सिस्टम और ज्यादा बैरल लंबाई इसे बेहद प्रभावी बनाते हैं। आने वाले वर्षों में बड़ी संख्या में ATAGS को सेना में शामिल किया जाना है। कुल मिलाकर, 77वें गणतंत्र दिवस की परेड भारत की सैन्य शक्ति, तकनीकी आत्मनिर्भरता और आतंक के खिलाफ उसकी स्पष्ट नीति का प्रदर्शन होगी। यह संदेश साफ है—भारत शांति चाहता है, लेकिन अगर उसकी ओर आंख उठी, तो जवाब निर्णायक और कठोर होगा। कर्तव्य पथ से उठने वाली यह गर्जना न सिर्फ देशवासियों का मनोबल बढ़ाएगी, बल्कि दुनिया को भी भारत की बदली हुई सामरिक ताकत का एहसास कराएगी।

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