मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में 77वां गणतंत्र दिवस: राष्ट्रीय उत्सव की गूँज प्रदेश से निकली
भोपाल । आज 26 जनवरी 2026 को देशभर की तरह मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में भी 77वां गणतंत्र दिवस हर्षोल्लास और देशभक्ति की भावना के साथ मनाया जा रहा है। संविधान के आदर्शों, लोकतंत्र की मजबूती और नागरिक जिम्मेदारियों को उजागर करने वाले इस राष्ट्रीय पर्व पर दोनों राज्यों में विविध कार्यक्रमों और आयोजनों का आयोजन किया गया है।
मध्यप्रदेश में भव्य परेड और जन-भागीदारी
राजधानी भोपाल में भव्य आयोजन
मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में आज गणतंत्र दिवस कार्यक्रम लाल परेड मैदान पर आयोजित किया गया, जहाँ व्यापक स्तर पर तैयारियों के बीच 23 प्लाटून और लगभग 1300 जवान की भागीदारी वाली परेड आयोजित की गई है, जो शहर इतिहास की सबसे भव्य परेड के रूप में दर्ज होने जा रही है। इस परेड में जवानों ने अनुशासन, साहस और देशभक्ति का शानदार प्रदर्शन किया, जिससे नागरिकों में उत्साह की लहर दौड़ गई।
इसके अतिरिक्त, राज्य स्तरीय समारोह में राज्यपाल द्वारा तिरंगा फहराया जाएगा और सरकार के वरिष्ठ अधिकारी “गार्ड ऑफ ऑनर” लेंगे। यह आयोजन सुबह के समय प्रारंभ हुआ और बड़ी संख्या में नागरिकों ने भाग लिया।
मुख्यमंत्री और स्थानीय कार्यक्रम
राज्य के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उज्जैन के कार्तिक मेला मैदान में भी ध्वजारोहण किया। वहां जुटी जनता को संबोधित किया। उज्जैन में तिरंगा वंदन समारोह निजी तथा सार्वजनिक स्थानों पर बड़े पैमाने पर आयोजित किए गए हैं, जिनमें स्थानीय नागरिकों और बच्चों की भागीदारी रही।
लोक भवन और सांस्कृतिक कार्यक्रम
भोपाल में गणतंत्र दिवस के मौके पर लोक भवन जनता के लिए 25 से 27 जनवरी तक खुला रखा गया है, जिससे लोग राष्ट्रीय पर्व के आसपास चल रहे सांस्कृतिक तथा प्रदर्शनी कार्यक्रमों का आनंद उठा सकें। प्रशासन ने कई प्रकार के संगीत, नृत्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की भी व्यवस्था की है, जिनसे प्रदेशवासियों में उत्सव की भावना और बढ़ी है।
परंपरा और सामाजिक समरसता
मध्यप्रदेश के नीमच जिले के छोटे से गांव हरवार में भी एक अनूठी देशभक्ति की परंपरा आज भी जीवित है। पिछले 75 वर्षों से यह गांव गणतंत्र दिवस पर सामूहिक सहभोज आयोजित करता आ रहा है। इस आयोजन की शुरुआत 1951 में नर्मदा बाई जाट ने की थी, जिन्होंने कहा था कि राष्ट्रीय पर्वों को हर व्यक्ति, धर्म या संप्रदाय के लोग मिलकर मनाएं। आज भी यह परंपरा ग्रामीणों और आसपास के क्षेत्रों में एकता और समानता का संदेश देती है।
छत्तीसगढ़ में उत्साह, नया इतिहास और शांति का प्रतीक
बस्तर के 41 गांवों में पहली बार उत्सव
छत्तीसगढ़ में यह गणतंत्र दिवस कुछ खास मायनों में ऐतिहासिक बन रहा है। राज्य के बस्तर क्षेत्र के ऐसे 41 गांव हैं जो दशकों से माओवादी प्रभाव के कारण राष्ट्रीय पर्वों का उत्सव नहीं मना पा रहे थे। इस बार इन गांवों में पहली बार तिरंगा फहराया जाएगा और गणतंत्र दिवस पूरे जोश और उत्साह के साथ मनाया जाएगा। यह परिवर्तन शांति, सुरक्षा व प्रशासनिक संपर्क में वृद्धि की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
बस्तर में यह कदम स्थानीय लोगों और सुरक्षा बलों के मिलकर किए प्रयास का नतीजा है, जिससे इन गांवों में अब लोकतांत्रिक मूल्यों और संविधान के प्रति सम्मान की भावना को मजबूती मिली है।
राज्य स्तर के समारोह
राज्य की राजधानी रायपुर में राज्यपाल रमेन डेका द्वारा राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया और विभिन्न सुरक्षा तथा प्रशासनिक इकाइयों से “गार्ड ऑफ ऑनर” लिया गया। इसके साथ-साथ बिलासपुर के कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने जनता को संबोधित किया। अन्य जिलों जैसे राजनांदगांव, जगदलपुर, अंबिकापुर और दुर्ग में भी अलग-अलग प्रमुख जनप्रतिनिधियों द्वारा तिरंगा फहराने और परेड तथा सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का आयोजन किया गया।
समाज और सेवा में योगदान को सम्मान
छत्तीसगढ़ में गणतंत्र दिवस के अवसर पर पुलिस विभाग के 11 अधिकारियों को राष्ट्रपति पदक सहित उच्च सम्मान दिए जाने की घोषणा की गयी है। ये सम्मान उन अधिकारियों को उनके उत्कृष्ट कार्यों, अनुशासन और सेवा के लिए प्रदान किए जाएंगे, जिससे राज्य में कानून-व्यवस्था और जनता के प्रति समर्पण को मान्यता मिलेगी।
स्व-सहायता समूह की प्रेरक कहानी
गणतंत्र दिवस के मौके पर छत्तीसगढ़ की “लखपति दीदी” लता साहू को भी सम्मानित किया जाना है। बिहान योजना से प्रेरित होकर अपने स्वरोजगार को स्थापित करने वाली लता साहू की यह कहानी ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी है। इस उपलब्धि के चलते उन्हें 26 जनवरी को दिल्ली में सम्मानित किया जाएगा, जो सामाजिक एवं आर्थिक सशक्तिकरण का प्रतीक है।
जनता में देशभक्ति की भावना और समरसता
मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ दोनों राज्यों में गणतंत्र दिवस के आयोजन में विविधता और समरसता का संदेश स्पष्ट रूप से झलक रहा है। स्कूल, कॉलेज और सामाजिक संगठनों द्वारा राष्ट्रगान, तिरंगा मार्च, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और अन्य कार्यक्रमों से युवा पीढ़ी में संविधान के महत्व और नागरिक कर्तव्यों के प्रति जागरूकता बढ़ रही है।
इस वर्ष 26 जनवरी 2026 का गणतंत्र दिवस न केवल संविधान को सम्मान देने का दिवस है, बल्कि यह उस राष्ट्रीय भावना का प्रतीक भी है जिसमें समाज के प्रत्येक वर्ग, क्षेत्र और समुदाय ने भाग लिया है। मध्यप्रदेश में भव्य परेड, सांस्कृतिक कार्यक्रम और सामाजिक परंपराएँ, तथा छत्तीसगढ़ में शांति-प्रक्रिया के तहत पहली बार राष्ट्रीय पर्वों को मनाने की उपलब्धि — इन सबने इस राष्ट्रीय पर्व को और भी गहरा, प्रेरक और यादगार बना दिया है।