फरीदाबाद से 300 किलो RDX बरामद: कश्मीर से मिला सुराग, बड़ी आतंकी साजिश नाकाम
जम्मू-कश्मीर पुलिस ने एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए हरियाणा के फरीदाबाद से करीब 300 किलो आरडीएक्स, एक AK-47 राइफल और भारी मात्रा में गोला-बारूद बरामद किया है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि यह विस्फोटक देश में बड़े आतंकी हमले की साजिश के लिए जमा किया गया था। पुलिस को यह सुराग कश्मीर में गिरफ्तार किए गए डॉक्टर आदिल अहमद राठर से मिला था। आदिल की निशानदेही पर ही फरीदाबाद में छापेमारी कर यह बड़ी बरामदगी की गई।
- कश्मीर सुराग से फरीदाबाद हड़कंप
- डॉक्टर बने आतंकी नेटवर्क का हिस्सा
- फरीदाबाद से 300 किलो RDX बरामद
- एनआईए-आईबी की जांच टीम सक्रिय
- देश में बड़ी साजिश नाकाम हुई
कश्मीर से मिला सुराग, फरीदाबाद में छिपा था विस्फोटक
सूत्रों के मुताबिक, जम्मू-कश्मीर पुलिस ने कुछ दिन पहले श्रीनगर में डॉक्टर आदिल अहमद राठर को गिरफ्तार किया था। पूछताछ में आदिल ने कबूल किया कि उसने अपने साथी डॉक्टर मुजमिल के साथ मिलकर फरीदाबाद में हथियारों और विस्फोटकों का जखीरा छिपा रखा है। आदिल की जानकारी के आधार पर पुलिस की एक विशेष टीम हरियाणा पहुंची और फरीदाबाद के एक किराए के मकान से यह विस्फोटक बरामद किया।
बरामदगी में 300 किलो आरडीएक्स, एक एके-47 राइफल, मैगजीन और सैकड़ों कारतूस शामिल हैं। जांच अधिकारियों के अनुसार, इतनी बड़ी मात्रा में विस्फोटक किसी बड़े आतंकी हमले या धमाके की योजना की ओर इशारा करता है।
अल-फलाह मेडिकल कॉलेज से जुड़ा था डॉक्टर मुजमिल
पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि डॉक्टर मुजमिल, जो कश्मीर का रहने वाला है, फरीदाबाद के अल-फलाह मेडिकल कॉलेज में जूनियर डॉक्टर के पद पर कार्यरत था। इसी दौरान उसने स्थानीय नेटवर्क बनाकर विस्फोटक सामग्री इकट्ठा की और उसे कॉलेज परिसर के पास किराए के मकान में छिपाकर रखा।
पुलिस को शक है कि डॉक्टर मुजमिल और आदिल दोनों का संबंध जैश-ए-मोहम्मद और गजवत-उल-हिंद जैसे आतंकी संगठनों से है। जांच में यह भी सामने आया है कि दोनों मेडिकल पेशे की आड़ में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने की तैयारी में थे।
डॉक्टरों का आतंकी नेटवर्क बेनकाब
जम्मू-कश्मीर पुलिस के अनुसार, यह कार्रवाई एक बड़े ऑपरेशन का हिस्सा है, जिसके तहत डॉक्टरों और शिक्षित युवाओं के आतंकी नेटवर्क की जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियों को शक है कि यह नेटवर्क न केवल जम्मू-कश्मीर बल्कि दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में भी सक्रिय था। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पूछताछ के दौरान यह पता चला कि गिरोह का उद्देश्य किसी धार्मिक स्थल, सार्वजनिक आयोजन या सरकारी प्रतिष्ठान को निशाना बनाना था। हालांकि, समय रहते पुलिस ने इस साजिश को नाकाम कर दिया।
फरीदाबाद में मचा हड़कंप, जांच एजेंसियां सतर्क
हरियाणा पुलिस, एनआईए (राष्ट्रीय जांच एजेंसी) और इंटेलिजेंस ब्यूरो की टीमें अब इस केस की जांच में जुट गई हैं। फरीदाबाद पुलिस ने उस मकान को सील कर दिया है, जहां से विस्फोटक बरामद हुआ। फॉरेंसिक विशेषज्ञों की टीम ने मौके से नमूने लेकर जांच शुरू कर दी है। स्थानीय प्रशासन ने आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा बढ़ा दी है और संदिग्ध गतिविधियों पर निगरानी रखी जा रही है। बताया जा रहा है कि यह मकान कुछ महीनों पहले ही किराए पर लिया गया था और वहां कोई ज्यादा आवाजाही नहीं होती थी।
आतंकी साजिश का था राष्ट्रीय स्तर का नेटवर्क
सुरक्षा एजेंसियों को शक है कि इस साजिश का नेटवर्क पाकिस्तान स्थित आतंकी ठिकानों से जुड़ा हो सकता है। प्राथमिक जांच में संकेत मिले हैं कि विस्फोटक सीमा पार से सप्लाई किया गया था और दिल्ली-एनसीआर में किसी बड़ी घटना को अंजाम देने की तैयारी थी। जम्मू-कश्मीर पुलिस के एक अधिकारी ने बताया, “डॉक्टर आदिल की गिरफ्तारी ने इस पूरे नेटवर्क की परतें खोल दी हैं। यह पहली बार है जब इतने शिक्षित युवाओं की संलिप्तता आतंकी गतिविधियों में देखी जा रही है।”
लगातार पूछताछ, और भी खुलासों की संभावना
फिलहाल डॉक्टर आदिल अहमद राठर और डॉक्टर मुजमिल दोनों पुलिस हिरासत में हैं। पूछताछ में कई और नाम सामने आने की संभावना है। पुलिस का मानना है कि इस नेटवर्क में कश्मीर, हरियाणा, दिल्ली और यूपी के कुछ लोग भी शामिल हो सकते हैं। सुरक्षा एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि 300 किलो आरडीएक्स देश में कैसे पहुंचा और इसका वित्त पोषण कहां से हुआ। एनआईए ने इस मामले में मनी ट्रेल (पैसे के स्रोत) की भी जांच शुरू कर दी है।
सुरक्षा एजेंसियों की बड़ी कामयाबी
यह बरामदगी न केवल जम्मू-कश्मीर पुलिस बल्कि पूरे देश की सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ी सफलता मानी जा रही है। इससे स्पष्ट है कि आतंकी संगठन अभी भी भारत में बड़े हमलों की साजिश रचने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन सुरक्षा तंत्र की सतर्कता से एक बार फिर उनकी योजना विफल हो गई। एक अधिकारी ने कहा, “अगर यह विस्फोटक समय रहते बरामद नहीं किया जाता, तो देश में बड़ा हादसा हो सकता था। यह पुलिस और खुफिया एजेंसियों की सजगता का परिणाम है कि आज सैकड़ों निर्दोष लोगों की जान बच गई।” फिलहाल दोनों डॉक्टरों से पूछताछ जारी है और सुरक्षा एजेंसियां अब इस बात की जांच कर रही हैं कि आखिर आतंक का यह नया मेडिकल नेटवर्क किन-किन राज्यों तक फैला है। जांच में नए लिंक मिलने की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा।





