20 जुलाई का मानसून…देशभर के कई राज्यों में आज राहत…खेती से लेकर जनजीवन तक प्रभावित

20 July 2025 Monsoon relief in many states across the country today from agriculture to public life affected

20 जुलाई का मानसून…देशभर के कई राज्यों में आज राहत…खेती से लेकर जनजीवन तक प्रभावित

20 जुलाई 2025 को भारतीय मौसम विभाग IMD ने कोई विशेष अलर्ट जारी नहीं किया है, लेकिन उत्तर भारत के कई राज्यों में बारिश और वज्रपात का मौसम बना रहेगा। दिल्ली-एनसीआर, यूपी, हरियाणा, राजस्थान, एमपी, बिहार, झारखंड, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में कहीं कहीं मानसूनी बारिश के आसार मिले हैं। हालांकि इन इलाकों में पिछले 24 घंटों में जोरदार बारिश हुई, जिससे जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया।

बिजली गिरने की घटनाओं में कई जानें भी गई हैं। खेतों में पानी भरने से फसलें डूबने लगी हैं और शहरी क्षेत्रों में जलजमाव के कारण आवागमन प्रभावित हुआ है। मौसम विभाग ने लोगों को घरों में रहने और खुले स्थानों से दूर रहने की सलाह दी है।

महाराष्ट्र और गुजरात में उफनती नदियां, अलर्ट जारी

महाराष्ट्र, गुजरात, गोवा और छत्तीसगढ़ में मानसून तेज हो गया है। नदियों का जलस्तर बढ़ रहा है और बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। खासकर महाराष्ट्र के कोंकण और विदर्भ क्षेत्रों में भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। गुजरात में सौराष्ट्र और दक्षिणी जिलों में कई इलाकों में जलभराव के हालात बन चुके हैं।

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में बने दो मजबूत मौसमी सिस्टम इन राज्यों पर असर डाल रहे हैं। इन दो सिस्टमों के एक साथ सक्रिय होने से ट्रफ लाइन मजबूत बनी हुई है, जो पश्चिमी तट पर भीषण बारिश की प्रमुख वजह है।

पूर्वोत्तर राज्यों में बारिश की संभावना

अगले 24 घंटों में असम, पश्चिम बंगाल, मेघालय, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश में भयंकर बारिश की संभावना जताई गई है। इन राज्यों में पहले से ही कई क्षेत्रों में भू-स्खलन और बाढ़ की घटनाएं हो चुकी हैं। नदी तटों पर बसे गांवों में पानी घुसने की खबरें हैं, जिससे लोग सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन कर रहे हैं।
गुवाहाटी, शिलॉन्ग और डिब्रूगढ़ जैसे शहरों में जलजमाव से सड़कों पर ट्रैफिक ठप है। प्रशासन ने एनडीआरएफ की टीमें तैनात कर दी हैं और राहत शिविर खोले जा चुके हैं।

दक्षिण भारत में मानसून सक्रिय, किसान सतर्क

तमिलनाडु, तेलंगाना, कर्नाटक, केरल और आंध्र प्रदेश में भी मानसूनी बारिश ने रफ्तार पकड़ ली है। चेन्नई, बेंगलुरु और हैदराबाद में मूसलाधार बारिश के कारण तापमान में गिरावट आई है लेकिन साथ ही कई इलाकों में जलभराव की समस्या बढ़ गई है।

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार यदि यह बारिश कुछ और दिनों तक जारी रही तो खरीफ फसलों को काफी लाभ मिलेगा, खासकर धान और मक्का की फसलें मजबूत होंगी। हालांकि, कहीं-कहीं भारी बारिश के कारण सब्जियों और मूंगफली जैसी फसलों को नुकसान भी हो सकता है।

खेती पर संकट और असंतुलित मानसून का खतरा

जुलाई को मानसून का सबसे प्रमुख महीना माना जाता है। यदि इस महीने वर्षा सामान्य नहीं रहती, तो देश की कृषि व्यवस्था पर गहरा असर पड़ता है। इस बार भी कुछ क्षेत्रों में बहुत कम और कुछ में अत्यधिक बारिश देखने को मिल रही है, जो चिंता का विषय है।
जलवायु विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में मानसून का स्वरूप असंतुलित होता जा रहा है। कहीं बाढ़ तो कहीं सूखे की स्थिति बनती है। ऐसी विषम परिस्थितियां किसानों के लिए आर्थिक संकट का कारण बन सकती हैं। बारिश का असमान वितरण कृषि उत्पादन, बाजार दरों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर गहरा असर डालता है।

मानसून ट्रफ और नए सिस्टम का असर

मौसम विज्ञानियों के अनुसार वर्तमान में जो दो मौसमी सिस्टम सक्रिय हैं, वे बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में विकसित हुए हैं। यह दोनों सिस्टम मानसून ट्रफ से जुड़े हैं, जिसके चलते पूरे भारत में वर्षा गतिविधियों में तेजी आई है। 20 जुलाई के बाद बंगाल की खाड़ी पर एक और नया सिस्टम बनने जा रहा है, जो पूर्वी, उत्तर और मध्य भारत को प्रभावित करेगा। इससे बिहार, पश्चिम बंगाल, झारखंड, उत्तर प्रदेश और ओडिशा जैसे राज्यों में फिर से तेज बारिश की संभावना बन रही है।

सतर्कता और संतुलन की दरकार

मानसून का यह चरण भारत के लिए बेहद निर्णायक साबित हो सकता है। जहां एक ओर वर्षा से राहत और फसल की उम्मीद है, वहीं दूसरी ओर बाढ़ और आपदा की आशंका भी है। सरकार और नागरिकों दोनों को सतर्क रहने की जरूरत है। किसानों के लिए यह समय सावधानीपूर्वक कृषि निर्णय लेने का है। जलवायु परिवर्तन के इस दौर में असंतुलित मानसून का प्रभाव हर साल बढ़ता जा रहा है। ऐसे में जल प्रबंधन, समय रहते अलर्ट सिस्टम और फसल बीमा योजनाएं अहम भूमिका निभा सकती हैं।…(प्रकाश कुमार पांडेय)

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