गुजरात के केवडिया स्थित ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ पर इस वर्ष लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती भव्य रूप से मनाई जाएगी। यह अवसर केवल एक उत्सव नहीं बल्कि भारत की एकता, अखंडता और राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक बनने जा रहा है। 31 अक्टूबर 2025 को पूरे देश में राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में यह दिन ऐतिहासिक रूप से मनाया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं इस समारोह में शामिल होकर लौह पुरुष को नमन करेंगे।
- सरदार पटेल की 150वीं जयंती
- एकता का महोत्सव बनेगा केवडिया
- केवडिया में है‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’
‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ केवल सरदार पटेल की प्रतिमा नहीं, बल्कि भारत की अखंडता और दृढ़ता का प्रतीक है। सरदार पटेल ने जिस समर्पण से 565 रियासतों को भारत में जोड़ा, वही भावना आज इस आयोजन में झलकती है। 150वीं जयंती का यह उत्सव देश को फिर से एकता, समरसता और राष्ट्रप्रेम की भावना से ओतप्रोत करेगा। प्रधानमंत्री मोदी की उपस्थिति इस अवसर को ऐतिहासिक बना देगी और एक बार फिर केवडिया भारत की एकता के केंद्र के रूप में चमकेगा। बता दें ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ विश्व की सबसे ऊंची प्रतिमा है और इसके निर्माण के बाद से हर वर्ष सरदार पटेल जयंती यहां विशेष आयोजन के साथ मनाई जाती है। इस बार की जयंती खास है क्योंकि यह सरदार पटेल के जन्म के 150 वर्ष पूरे होने का प्रतीक है। इस ऐतिहासिक मौके पर केवडिया और एकतानगर को दुल्हन की तरह सजाया गया है। आयोजन स्थल पर विशाल मंच, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और सुरक्षा के पुख्ता इंतज़ाम किए गए हैं। गुजरात के मुख्य सचिव पंकज जोशी और पुलिस महानिदेशक विकास सहाय ने बताया कि इस वर्ष का एकता दिवस समारोह अब तक का सबसे भव्य आयोजन होगा। ‘एकता’ थीम पर आधारित 10 आकर्षक झांकियां राज्यों की सामाजिक, सांस्कृतिक और विकासात्मक उपलब्धियों को प्रदर्शित करेंगी। ये झांकियां भारत की विविधता में एकता की भावना को जीवंत रूप में प्रस्तुत करेंगी।
राष्ट्रीय एकता दिवस पर भव्य परेड
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण राष्ट्रीय एकता दिवस की परेड होगी। इसमें बीएसएफ, सीआरपीएफ, सीआईएसएफ, आईटीबीपी, एसएसबी, एनसीसी के अलावा जम्मू-कश्मीर, पंजाब, असम, त्रिपुरा, ओडिशा, छत्तीसगढ़, केरल, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश की कुल 16 टुकड़ियां हिस्सा लेंगी। इन टुकड़ियों का उद्देश्य भारत की सुरक्षा, अनुशासन और राष्ट्रीय एकता का संदेश देना है। इस अवसर पर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में शामिल बीएसएफ के 16 पदक विजेता और सीआरपीएफ के पांच शौर्य चक्र विजेता भी खुली जिप्सियों में परेड का हिस्सा बनेंगे। ये वीर सैनिक अपने साहस और देशभक्ति के प्रतीक के रूप में देशवासियों को प्रेरित करेंगे।
सांस्कृतिक वैभव और संगीत की गूंज
परेड का नेतृत्व हेराल्डिंग टीम के लगभग 100 सदस्य करेंगे, जो रंग-बिरंगे पारंपरिक परिधानों और देश के विभिन्न वाद्य यंत्रों के साथ वातावरण को देशभक्ति से भर देंगे। इस आयोजन में नौ सैन्य बैंड टुकड़ियां भी भाग लेंगी जो मनमोहक धुनों से समारोह को और भी भव्य बनाएंगी।
आजदी से लेकर भारत के निर्माण तक सरदार पटेल की अहम भूमिका
सरदार वल्लभभाई पटेल भारत के उन महान नेताओं में से एक थे जिन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर आज़ाद भारत के निर्माण तक हर मोर्चे पर अपनी अमिट छाप छोड़ी। उन्हें “लौह पुरुष” के रूप में जाना जाता है, क्योंकि उनके दृढ़ निश्चय, कठोर अनुशासन और अटूट संकल्प ने एक बिखरे हुए भारत को एक सूत्र में बांध दिया। सरदार पटेल का जीवन संघर्ष, नेतृत्व और राष्ट्रभक्ति का अद्वितीय उदाहरण है।भारत की स्वतंत्रता संग्राम की कथा में कई ऐसे नायक हैं जिन्होंने अपने साहस, दृढ़ता और विवेक से देश को नई दिशा दी। उन्हीं में एक नाम है — वल्लभभाई झावरभाई पटेल, जिन्हें देश प्रेमपूर्वक “सरदार पटेल” के नाम से जानता है। वे न केवल भारत की स्वतंत्रता आंदोलन के अग्रणी नेता थे, बल्कि आज़ाद भारत के निर्माण और एकीकरण के प्रमुख शिल्पकार भी रहे। 31 अक्तूबर 1875 को गुजरात के नडियाद में जन्मे पटेल का जीवन संघर्ष, दृढ़निश्चय और समर्पण का प्रतीक था। उन्होंने वकालत से लेकर प्रशासन तक हर क्षेत्र में अपनी असाधारण प्रतिभा का परिचय दिया और देश की अखंडता के लिए जीवनभर समर्पित रहे…
सरदार वल्लभभाई पटेल का पूरा जीवन राष्ट्र की सेवा के लिए समर्पित रहा। उन्होंने न केवल भारत की स्वतंत्रता में योगदान दिया, बल्कि एक सशक्त, एकीकृत और संगठित भारत की नींव रखी। उनके कारण आज भारत एक अखंड राष्ट्र के रूप में खड़ा है। 2018 में गुजरात के केवड़िया में स्थापित “स्टैच्यू ऑफ यूनिटी” उनकी इसी भावना का प्रतीक है — जो हमें याद दिलाती है कि एक व्यक्ति की दृढ़ इच्छाशक्ति, नीतियों और साहस से पूरा देश एक सूत्र में बंध सकता है। निस्संदेह, सरदार पटेल केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माता थे — जिनका व्यक्तित्व भारत की आत्मा में सदैव अमर रहेगा
रियासतों का एकीकरण — एक ऐतिहासिक उपलब्धि
स्वतंत्रता के बाद भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती थी— देश में फैली 565 रियासतों को एक साथ लाना। ब्रिटिश शासन की समाप्ति के बाद कई राजघराने स्वतंत्र रहना चाहते थे। जिससे भारत के एकीकरण का सपना अधूरा रह सकता था। इस कठिन परिस्थिति में सरदार पटेल ने अपनी सूझबूझ, कूटनीति और दृढ़ता से सभी रियासतों को भारतीय संघ में शामिल किया। उनके सहयोगी वीपी मेनन के साथ मिलकर उन्होंने बिना किसी बड़े संघर्ष के यह असंभव कार्य संभव कर दिखाया। जूनागढ़, हैदराबाद और कश्मीर जैसी जटिल रियासतों का भारत में विलय उनके राजनीतिक कौशल का प्रमाण है।
राजनीतिक और प्रशासनिक नेतृत्व
सरदार पटेल भारत के पहले उप-प्रधानमंत्री और गृह मंत्री बने। इस पद पर रहते हुए उन्होंने देश की प्रशासनिक व्यवस्था की मजबूत नींव रखी। भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) और भारतीय पुलिस सेवा (IPS) जैसे संस्थानों की स्थापना उनके विजन का परिणाम थी। उनका मानना था कि एक सशक्त प्रशासन ही देश की अखंडता और स्थिरता का आधार हो सकता है।
विभाजन के बाद पुनर्वास का महान कार्य
1947 में भारत के विभाजन के बाद लाखों शरणार्थी पाकिस्तान से भारत आए। यह देश के इतिहास का सबसे बड़ा मानवीय संकट था। सरदार पटेल ने दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ राहत और पुनर्वास कार्यों को व्यवस्थित किया। उन्होंने दिल्ली, पंजाब और उत्तर भारत के अन्य हिस्सों में शरणार्थियों के लिए आवास, रोजगार और सुरक्षा की व्यवस्था करवाई।
आधुनिक भारत की नींव
पटेल का दृष्टिकोण केवल राजनीतिक नहीं बल्कि राष्ट्रनिर्माण पर केंद्रित था। उन्होंने संचार, सूचना, उद्योग और सार्वजनिक सेवाओं को मजबूत करने पर बल दिया। उनके नेतृत्व में राज्यों और केंद्र के बीच सहयोग की भावना को विकसित किया गया, जिससे भारत एक संगठित राष्ट्र के रूप में उभरा।
दृढ़ नेतृत्व और प्रेरणा का प्रतीक
सरदार पटेल का जीवन इस बात का प्रमाण है कि सच्चा नेतृत्व केवल सत्ता प्राप्त करना नहीं, बल्कि राष्ट्र को दिशा देना है। उन्होंने कभी परिस्थितियों के आगे झुकना नहीं सीखा। उनकी दृढ़ता और दूरदर्शिता ने आने वाली पीढ़ियों को यह संदेश दिया कि देश की एकता सर्वोपरि है। सरदार वल्लभभाई पटेल केवल एक नेता नहीं, बल्कि भारत की एकता और अखंडता के प्रतीक हैं। उन्होंने जो कार्य स्वतंत्र भारत के आरंभिक वर्षों में किया, वही आज हमारे लोकतंत्र और प्रशासन की रीढ़ बना हुआ है। सच में, वे “असरदार सरदार” थे। जिनके बिना भारत का मानचित्र शायद अधूरा रह जाता। (प्रकाश कुमार पांडेय)





