कम सैलरी होने पर बचत करना मुश्किल जरूर लगता है, लेकिन सही तरीके से बजट बनाया जाए तो छोटी आमदनी में भी हर महीने कुछ पैसा अलग रखा जा सकता है। मान लीजिए आपकी मासिक आय ₹15,000 है, तो आप अपनी जरूरतों और खर्चों को व्यवस्थित करके करीब ₹1,500 से ₹3,000 तक बचाने की कोशिश कर सकते हैं। यही आदत आगे चलकर बड़ी रकम तैयार करने में मदद कर सकती है। इसके लिए सबसे जरूरी है कि सैलरी आते ही पूरा पैसा खर्च करने के बजाय पहले से तय किया जाए कि कितना पैसा कहां इस्तेमाल होगा और कितना बचाना है।
सबसे पहले अपनी पूरी महीने की कमाई और जरूरी खर्चों का बजट तैयार करें
बचत शुरू करने का पहला कदम महीने का बजट बनाना है। सैलरी आने के बाद जरूरी खर्चों की सूची तैयार करें। इसमें घर या कमरे का किराया, राशन, बिजली-पानी का बिल, आने-जाने का खर्च और दूसरी जरूरी जरूरतें शामिल की जा सकती हैं। जब आपको पता रहेगा कि हर महीने कितना पैसा जरूरी खर्चों में जा रहा है, तब गैर-जरूरी खर्चों को पहचानना आसान होगा।
ऑनलाइन खरीदारी और बिना जरूरत के खर्चों पर लगाम लगाकर बचत बढ़ाएं
कमाई बढ़ाना हमेशा आपके हाथ में नहीं होता, लेकिन खर्चों को नियंत्रित करना आपके हाथ में जरूर है। इसलिए बिना जरूरत की खरीदारी से बचें। खासतौर पर ऑनलाइन शॉपिंग में ऐसी चीजें खरीदने से पहले दो बार सोचें, जिनकी तत्काल जरूरत नहीं है। छोटे-छोटे गैर-जरूरी खर्च महीने के आखिर में बड़ी रकम बन जाते हैं और बचत का लक्ष्य बिगाड़ देते हैं।
बाहर खाना कम करके हर महीने के बजट में अच्छी रकम बचाई जा सकती है
शहरों में नौकरी करने वाले या अकेले रहने वाले लोगों के लिए बाहर खाना आम बात है, लेकिन इसका असर महीने के बजट पर पड़ता है। अगर संभव हो तो घर या कमरे पर खाना बनाने की आदत डालें। इससे खाने पर होने वाला खर्च कम किया जा सकता है और बचा हुआ पैसा दूसरी जरूरतों या बचत के लिए इस्तेमाल हो सकता है।
₹15 हजार की सैलरी में ₹1,500 से ₹3,000 अलग रखने का लक्ष्य बनाएं
सैलरी मिलते ही पहले जरूरी खर्चों का अनुमान लगाएं और उसके बाद बचत के लिए तय रकम अलग कर दें। ₹15,000 की आय में शुरुआत के तौर पर ₹1,500 से ₹3,000 तक बचाने का लक्ष्य रखा जा सकता है। यही तरीका ₹30,000 या ₹50,000 की सैलरी पर भी अपनी परिस्थितियों के अनुसार अपनाया जा सकता है। नियमित बचत धीरे-धीरे बड़ी रकम में बदल सकती है।
50:30:20 नियम से जरूरत, पसंद और बचत के बीच संतुलन बनाएं
बजट को व्यवस्थित करने के लिए 50:30:20 नियम को समझा जा सकता है। इसमें आय का 50 प्रतिशत जरूरी खर्चों, 30 प्रतिशत पसंद या अन्य खर्चों और 20 प्रतिशत बचत के लिए रखने का सिद्धांत बताया जाता है। हालांकि हर व्यक्ति की आय और जिम्मेदारियां अलग होती हैं, इसलिए इसे अपनी स्थिति के अनुसार ढाला जा सकता है। सबसे अहम बात यह है कि बचत को महीने के अंत में बची रकम न मानकर बजट का हिस्सा बनाया जाए।





