चीनी राष्ट्रीय जन कांग्रेस (एनपीसी) की स्थायी समिति के उपाध्यक्ष छंग च्येनपांग ने 26 और 27
अक्टूबर को नई दिल्ली में आयोजित 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच में हिस्सा लिया। उन्होंने चीनी
प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया और मंच पर मुख्य भाषण भी दिया।
अपने संबोधन में छंग च्येनपांग ने कहा कि चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने ब्रिक्स देशों के नेताओं
की 18वीं शिखर बैठक में प्रस्ताव रखा था कि ब्रिक्स देशों को नवाचार और विकास को बढ़ावा देने,
शांति और स्थिरता बनाए रखने, विभिन्न सभ्यताओं के बीच आदान-प्रदान बढ़ाने और वैश्विक
शासन व्यवस्था में सुधार करने में अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने कहा कि इस प्रस्ताव ने
ब्रिक्स सहयोग के ऐतिहासिक दायित्वों को स्पष्ट करने के साथ-साथ भविष्य की दिशा भी तय की
है।
छंग च्येनपांग ने कहा कि ब्रिक्स देश वैश्विक दक्षिण की प्रमुख ताकत बन चुके हैं। उन्होंने जोर
देकर कहा कि संसदीय सहयोग, ब्रिक्स देशों के बीच व्यापक सहयोग का एक अहम हिस्सा है।
इससे आपसी सहयोग की नींव मजबूत होती है, संस्थागत स्तर पर लचीलापन बढ़ता है और शासन
से जुड़ी चुनौतियों का समाधान खोजने में मदद मिलती है। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स देशों की संसदों
को आपसी एकजुटता और सहयोग मजबूत करना चाहिए, समय की जरूरतों के अनुरूप आगे
बढ़ना चाहिए और अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था को अधिक निष्पक्ष तथा न्यायसंगत बनाने में योगदान
देना चाहिए।
इस मंच के दौरान छंग च्येनपांग ने भारत, रूस, थाईलैंड, युगांडा, बेलारूस, क्यूबा और ईरान समेत
कई देशों के संसदीय नेताओं से अलग-अलग मुलाकातें भी कीं। इन बैठकों में उन्होंने विभिन्न
देशों की विधायी संस्थाओं के बीच सहयोग को और मजबूत करने के तरीकों पर विचारों का आदान-
प्रदान किया।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)





