उत्तर प्रदेश में महिला सशक्तिकरण, सुरक्षा और न्याय को मजबूत करने की दिशा में बीते वर्षों में अनेक ऐतिहासिक निर्णय लिए गए हैं। विशेष रूप से बालिकाओं और महिलाओं से जुड़े मामलों में त्वरित न्याय, शिक्षा, स्वास्थ्य, सम्मान और आत्मनिर्भरता को केंद्र में रखकर योजनाओं का व्यापक विस्तार किया गया है।
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नारी सुरक्षा को मजबूत कदम
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पॉक्सो मामलों में त्वरित न्याय
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फास्ट ट्रैक कोर्ट से राहत
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बेटियों की शिक्षा पर जोर
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सुकन्या योजना से आर्थिक संबल
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उज्ज्वला से महिलाओं को सुविधा
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मिशन शक्ति से स्वावलंबन
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एंटी रोमियो स्क्वायड सक्रिय
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मातृ वंदना से स्वास्थ्य सुरक्षा
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स्वयं सहायता समूहों से आत्मनिर्भरता
सबसे महत्वपूर्ण कदमों में पॉक्सो (POCSO) से जुड़े मामलों की शीघ्र सुनवाई के लिए देशभर में 1023 फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित करने का निर्णय है। उत्तर प्रदेश में ही 218 फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित किए जा चुके हैं। इसके साथ ही महिलाओं को त्वरित न्याय दिलाने के लिए 81 मजिस्ट्रेट स्तरीय न्यायालय और 81 अपर सत्र न्यायालय अलग से बनाए गए हैं। इन व्यवस्थाओं से दुष्कर्म, बाल उत्पीड़न और महिला हिंसा जैसे मामलों में लंबित मुकदमों का तेजी से निस्तारण सुनिश्चित किया जा रहा है। महिला सुरक्षा के मोर्चे पर ‘सेफ सिटी परियोजना’ लागू की गई और छेड़छाड़ की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए हर जिले में एंटी रोमियो स्क्वायड का गठन हुआ। स्क्वायड द्वारा 1.09 करोड़ से अधिक व्यक्तियों की चेकिंग की गई, 10,876 अभियोग पंजीकृत हुए और 16,045 व्यक्तियों के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई की गई। साथ ही 45 लाख से अधिक लोगों को चेतावनी दी गई। प्रदेश के सभी 1535 थानों में महिला हेल्प डेस्क स्थापित की गई है तथा वूमेन पावर लाइन 1090 के माध्यम से 98.80% शिकायतों का निस्तारण सुनिश्चित किया गया।
बालिकाओं की आर्थिक सुरक्षा के लिए प्रधानमंत्री सुकन्या समृद्धि योजना
बालिकाओं की आर्थिक सुरक्षा के लिए प्रधानमंत्री सुकन्या समृद्धि योजना प्रभावी रूप से संचालित हो रही है। इस योजना के तहत बालिका के नाम खाता खोलकर 14 वर्षों तक राशि जमा की जाती है। 18 वर्ष की आयु पर 50% धनराशि निकाली जा सकती है और 21 वर्ष पर परिपक्वता राशि ब्याज सहित, कर मुक्त रूप में प्राप्त होती है। उत्तर प्रदेश में बड़ी संख्या में परिवार इस योजना से लाभान्वित हो रहे हैं। शिक्षा के क्षेत्र में ‘उड़ान योजना’ के माध्यम से मेधावी छात्राओं को गणित और विज्ञान की निःशुल्क ऑनलाइन कोचिंग उपलब्ध कराई जा रही है, ताकि वे तकनीकी संस्थानों में प्रवेश पा सकें। इसके साथ ही बालिकाओं को स्नातक स्तर तक निःशुल्क शिक्षा की सुविधा दी गई है। किशोरी बालिका योजना के तहत 2 लाख से अधिक किशोरियां लाभान्वित हुई हैं।
‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान ने सामाजिक मानसिकता में सकारात्मक बदलाव लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वर्ष 2020-21 में 1.96 लाख गतिविधियों के माध्यम से 1 करोड़ 80 लाख महिलाओं और बालिकाओं तक जागरूकता संदेश पहुंचाया गया। प्रदेश में इस योजना के अंतर्गत व्यापक जनसंपर्क और जागरूकता कार्यक्रम चलाए गए।
प्रधानमंत्री मातृ वन्दना योजना से 40 लाख से अधिक माताएं लाभान्वित
स्वास्थ्य क्षेत्र में प्रधानमंत्री मातृ वन्दना योजना से 40 लाख से अधिक माताएं लाभान्वित हुई हैं। प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के अंतर्गत जुलाई 2021 तक 1581 शिविर आयोजित किए गए, जिनमें 3,99,348 उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की पहचान की गई। प्रत्येक माह की 21 तारीख को “खुशहाल परिवार दिवस” मनाकर 3,39,395 लाभार्थियों को परिवार नियोजन सेवाएं दी गईं।
आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत 1 करोड़ 67 लाख निःशुल्क गैस कनेक्शन वितरित कर उत्तर प्रदेश देश में प्रथम स्थान पर रहा। मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना में 9 लाख 91 हजार से अधिक बेटियां लाभान्वित हुईं। इस योजना में जन्म से लेकर उच्च शिक्षा तक चरणबद्ध आर्थिक सहायता दी जाती है—जन्म पर 2000 रुपये, टीकाकरण पर 1000, कक्षा 1, 6, 9 में प्रवेश पर क्रमशः सहायता और आगे की पढ़ाई के लिए 5000 रुपये तक की एकमुश्त राशि।
1 लाख 52 हजार से अधिक कन्याओं का विवाह
मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के अंतर्गत 1 लाख 52 हजार से अधिक कन्याओं का विवाह संपन्न कराया गया तथा अनुदान राशि 35,000 से बढ़ाकर 51,000 रुपये की गई। निराश्रित महिला पेंशन में आयु सीमा समाप्त कर 29 लाख से अधिक महिलाओं को 500 रुपये प्रतिमाह पेंशन दी जा रही है। मिशन शक्ति के अंतर्गत 10 लाख स्वयं सहायता समूह बनाकर 1 करोड़ महिलाओं को जोड़ा गया और 8.50 करोड़ महिलाओं को जागरूक किया गया। राज्य आजीविका मिशन से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों की महिलाएं आत्मनिर्भर बनी हैं। 55,964 बैंकिंग कॉरेस्पोंडेंस सखी नियुक्त की गईं, जो 75 हजार करोड़ रुपये से अधिक का लेनदेन संभाल रही हैं। बिजली सखी की 5,395 सदस्यों ने 62.50 करोड़ रुपये का बिल संग्रह किया। 705 प्रेरणा कैंटीनों के माध्यम से महिलाओं को 8 से 10 हजार रुपये मासिक आय प्राप्त हो रही है।
वन स्टॉप सेंटर सभी 75 जनपदों में स्थापित
वन स्टॉप सेंटर सभी 75 जनपदों में स्थापित किए गए हैं, जहां से 1,04,859 से अधिक महिलाएं लाभान्वित हुईं। सेफ सिटी, एंटी रोमियो स्क्वायड, महिला हेल्प डेस्क और विशेष न्यायालयों के माध्यम से सुरक्षा तंत्र को मजबूत किया गया है। राजस्व संहिता में संशोधन कर पौत्री, भतीजी और भांजी को भी भौमिक अधिकार देकर महिलाओं को पुरुषों के समान संपत्ति अधिकार प्रदान किए गए। अल्पसंख्यक मुस्लिम महिलाओं को बिना महरम हज पर जाने की सुविधा दी गई। आशा बहनों का मानदेय 600 से बढ़ाकर 1250 रुपये किया गया। मुख्यमंत्री सक्षम सुपोषण योजना, महिला सामर्थ्य योजना और महिला शक्ति केंद्रों के लिए अलग बजटीय प्रावधान किए गए।
इन सभी पहलों ने उत्तर प्रदेश में महिला सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन की नई तस्वीर प्रस्तुत की है। न्याय से लेकर रोजगार, शिक्षा से लेकर स्वास्थ्य और सामाजिक सम्मान तक—हर स्तर पर महिलाओं को सशक्त बनाने की दिशा में व्यापक कार्य हुआ है, जिससे प्रदेश में नारी सशक्तिकरण की मजबूत नींव तैयार हुई है।





