मध्य प्रदेश समान नागरिक संहिता UCC :दो शादी, तलाक और लिव-इन और हलाला पर सख्त प्रावधान

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मध्य प्रदेश समान नागरिक संहिता UCC :दो शादी, तलाक और लिव-इन और हलाला पर सख्त प्रावधान

मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन मोहन यादव सरकार ने बहुप्रतीक्षित मध्य प्रदेश समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक सदन में पेश कर दिया। तकनीकी शिक्षा एवं कौशल विकास मंत्री गौतम टेटवाल ने जैसे ही विधेयक सदन के पटल पर रखा, कांग्रेस विधायकों ने जोरदार विरोध और नारेबाजी शुरू कर दी। विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने विधेयक को सदन के रिकॉर्ड में शामिल करते हुए विस्तृत चर्चा के लिए आज मंगलवार का समय तय किया है।

हलाला पर सजा का प्रावधान
लिव-इन का रजिस्ट्रेशन होगा अनिवार्य
विवाह पंजीकरण और संपत्ति अधिकार तय
कांग्रेस का हंगामा, आज होगी विस्तृत चर्चा
UCC लागू करने की दिशा में एमपी का बड़ा कदममध्य प्रदेश सरकार ने विधानसभा में ‘मध्य प्रदेश समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक-2026’ पेश कर दिया है। उत्तराखंड, गुजरात और असम के कानूनों के अध्ययन के बाद तैयार किए गए इस ड्राफ्ट का उद्देश्य विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और पारिवारिक मामलों में समान कानूनी व्यवस्था लागू करना है। सरकार का दावा है कि यह कानून संविधान के अनुच्छेद-44 की भावना के अनुरूप महिलाओं को समान अधिकार और लैंगिक न्याय सुनिश्चित करेगा।

मोहन सरकार का दावा है कि यह विधेयक विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और पारिवारिक अधिकारों में समान व्यवस्था लागू करेगा। प्रस्तावित कानून के तहत विवाह का पंजीकरण अनिवार्य, निर्धारित आयु से पहले विवाह अमान्य, बच्चों को समान उत्तराधिकार और महिलाओं के अधिकारों को कानूनी सुरक्षा देने का प्रावधान किया गया है।

विधेयक में लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर भी सख्त नियम प्रस्तावित हैं। साथ रहने वाले जोड़े को एक महीने के भीतर रजिस्ट्रेशन कराना होगा। ऐसा नहीं करने पर तीन महीने तक की जेल या 10 हजार रुपये जुर्माना लगाया जा सकता है। गलत जानकारी देने पर 25 हजार रुपये जुर्माना और तीन महीने तक की सजा, जबकि नोटिस के बाद भी बयान नहीं देने पर छह महीने तक की जेल का प्रावधान है। लिव-इन से जन्मे बच्चों को वैध संतान का दर्जा और संपत्ति में अधिकार मिलेगा। महिला साथी को भरण-पोषण का दावा करने का भी अधिकार होगा।
विधेयक में हलाला जैसे विवादित प्रावधानों पर भी दंडात्मक व्यवस्था प्रस्तावित की गई है। उत्तराखंड के बाद मध्य प्रदेश UCC लागू करने की दिशा में बड़ा कदम बढ़ाने वाला प्रमुख राज्य बन गया है। अब पूरे प्रदेश की नजर सदन में होने वाली विस्तृत बहस और अंतिम निर्णय पर टिकी है।

एमपी UCC ड्राफ्ट की 10 बड़ी बातें, लिव-इन से वसीयत तक बदलेंगे कई नियम

लिव-इन छिपाने पर जेल का प्रावधान
हलाला और बहुविवाह पर सख्त रोक
बेटा-बेटी को संपत्ति में समान अधिकार
100% संपत्ति की वसीयत की आजादी
आदिवासी समुदाय को UCC से छूट

UCC ड्राफ्ट की 10 सबसे बड़ी बातें

1. आदिवासी समाज को छूट
अनुसूचित जनजातियों (भील, गोंड, बैगा, सहरिया, कोरकू, भारिया आदि) को इस कानून के दायरे से बाहर रखा गया है। संविधान के अनुच्छेद 342 और 366(25) के तहत संरक्षित समुदायों को भी यह छूट मिलेगी।

2. बहुविवाह पर पूरी तरह रोक
सभी धर्मों के लिए एक पत्नी या एक पति की व्यवस्था लागू होगी। पुरुष की न्यूनतम विवाह आयु 21 वर्ष और महिला की 18 वर्ष निर्धारित की गई है।

3. केवल अदालत से होगा तलाक
मौखिक तलाक, तीन तलाक या किसी अनौपचारिक पंचायत के जरिए विवाह समाप्त नहीं किया जा सकेगा। तलाक केवल कानून में निर्धारित आधारों पर न्यायालय के माध्यम से ही मान्य होगा।

4. निकाह हलाला दंडनीय अपराध
तलाक के बाद दोबारा विवाह के लिए किसी महिला को निकाह हलाला जैसी प्रथा अपनाने के लिए मजबूर करना या उसका प्रचार करना अपराध माना जाएगा और इस पर दंड का प्रावधान रहेगा।

5. शादी और तलाक का अनिवार्य पंजीकरण
प्रदेश के सभी नागरिकों के लिए विवाह और तलाक का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा। शहरी क्षेत्रों में ई-नगर पालिका पोर्टल और ग्रामीण क्षेत्रों में एसडीएम, पंचायत या नगर निकाय के माध्यम से पंजीकरण कराया जाएगा।

6. लिव-इन का रजिस्ट्रेशन जरूरी
लिव-इन में रहने वाले जोड़ों को एक महीने के भीतर रजिस्ट्रेशन कराना होगा। ऐसा नहीं करने पर तीन महीने तक की जेल या 10 हजार रुपये जुर्माना हो सकता है। गलत जानकारी देने पर 25 हजार रुपये जुर्माना और तीन महीने तक की सजा का प्रावधान है।

7. विवाहित व्यक्ति के लिव-इन पर 5 साल तक की सजा
यदि कोई विवाहित व्यक्ति किसी अन्य के साथ लिव-इन में रहता है, तो उसे पांच साल तक की जेल हो सकती है। 21 वर्ष से कम उम्र के पार्टनर्स के मामले में अभिभावकों को सूचना देना भी अनिवार्य होगा।

8. लिव-इन से जन्मे बच्चों को कानूनी अधिकार
लिव-इन संबंध से जन्म लेने वाले बच्चों को वैध माना जाएगा और उन्हें संपत्ति में पूरा उत्तराधिकार मिलेगा। महिला पार्टनर को भरण-पोषण का अधिकार भी प्राप्त होगा।

9. बेटा-बेटी और माता-पिता को समान उत्तराधिकार
ड्राफ्ट में उत्तराधिकार व्यवस्था को जेंडर-न्यूट्रल बनाया गया है। बेटा-बेटी दोनों को बराबर अधिकार मिलेंगे। मृतक की संपत्ति में जीवित माता और पिता भी प्रथम श्रेणी के उत्तराधिकारी होंगे।

10. 100% संपत्ति की वसीयत की स्वतंत्रता
कोई भी वयस्क अपनी स्वयं अर्जित और पैतृक संपत्ति की 100 प्रतिशत वसीयत अपनी इच्छा के अनुसार किसी भी व्यक्ति के नाम कर सकेगा। यह व्यवस्था भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम, 1925 के तहत संचालित होगी।

धार्मिक परंपराओं को भी संरक्षण

ड्राफ्ट में स्पष्ट किया गया है कि विभिन्न समुदायों के धार्मिक रीति-रिवाज, परंपराएं और सामाजिक समारोह, यदि वे सार्वजनिक व्यवस्था, नैतिकता और कानून के अनुरूप हैं, तो उन पर कोई रोक नहीं होगी। सरकार का कहना है कि UCC का उद्देश्य धार्मिक आस्थाओं में हस्तक्षेप नहीं, बल्कि नागरिक कानूनों में समानता और पारदर्शिता लाना है।

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