टैरिफ कटौती समझौते पर चीन-अमेरिका का बड़ा कदम: शुल्क कटौती समझौते पर दोनों देशों ने मांगी राय

US China Business Council

बीजिंग। दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं चीन और अमेरिका के बीच व्यापारिक रिश्तों को नई दिशा देने की कोशिशें तेज हो गई हैं। दोनों देश अब पारस्परिक शुल्क (टैरिफ) में कटौती और प्रस्तावित चीन-अमेरिका व्यापार परिषद के गठन को लेकर आगे बढ़ रहे हैं। इसी क्रम में दोनों सरकारें उद्योग जगत, व्यापार संगठनों और अन्य संबंधित पक्षों से सुझाव और राय मांग रही हैं, ताकि अंतिम समझौते को व्यावहारिक और व्यापक बनाया जा सके।

  1. टैरिफ कटौती पर आगे बढ़ी चीन-अमेरिका बातचीत
  2. व्यापार परिषद गठन पर जारी मंथन
  3. दोनों देशों में हितधारकों से मांगे गए सुझाव
  4. चीन में विदेशी निवेश में 5.3% की बढ़ोतरी
  5. हाई-टेक सेक्टर में निवेश ने पकड़ी रफ्तार

चीनी राज्य परिषद के सूचना कार्यालय द्वारा आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में चीनी वाणिज्य मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि दोनों देशों की व्यापारिक टीमें लगातार संपर्क में हैं और व्यापार परिषद की संरचना, कार्यप्रणाली तथा संचालन मॉडल पर विस्तृत चर्चा कर रही हैं। साथ ही दोनों पक्ष लगभग 30 अरब डॉलर के पारस्परिक शुल्क कटौती ढांचे को आगे बढ़ाने के विकल्पों पर भी विचार कर रहे हैं।

वाणिज्य मंत्रालय के विदेशी निवेश प्रशासन विभाग की महानिदेशक मेंग हुआटिंग ने बताया कि चीन इस प्रस्तावित शुल्क कटौती व्यवस्था पर घरेलू उद्योगों, व्यापारिक संगठनों, स्थानीय सरकारों, विदेशी निवेशकों तथा अमेरिका से जुड़ी कंपनियों और व्यापार संघों से व्यापक सुझाव प्राप्त कर रहा है। उनका कहना था कि इस प्रक्रिया का उद्देश्य ऐसा ढांचा तैयार करना है, जिससे व्यापार को बढ़ावा मिले और उद्योग जगत की वास्तविक जरूरतों को भी ध्यान में रखा जा सके।

मेंग हुआटिंग ने यह भी बताया कि अमेरिका में भी इसी तरह सार्वजनिक और व्यावसायिक स्तर पर राय ली जा रही है। दोनों देशों का प्रयास है कि बातचीत के जरिए जल्द से जल्द ऐसे उत्पादों की सूची पर सहमति बनाई जाए, जिन पर शुल्क में कटौती की जा सके। इसके बाद इस व्यवस्था को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा, जिससे द्विपक्षीय व्यापार को नई गति मिल सके।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह प्रस्ताव सफल होता है तो कई वर्षों से चले आ रहे व्यापारिक तनाव में कमी आ सकती है। शुल्क में कटौती से दोनों देशों के निर्यातकों और आयातकों को राहत मिलने की संभावना है, वहीं वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) को भी मजबूती मिल सकती है। विशेष रूप से विनिर्माण, इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी और उपभोक्ता वस्तुओं के कारोबार पर इसका सकारात्मक असर पड़ सकता है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान चीन के वाणिज्य उप मंत्री येन डोंग ने विदेशी निवेश से जुड़े आंकड़े भी साझा किए। उन्होंने बताया कि वर्ष 2026 की पहली छमाही में चीन में नव स्थापित विदेशी निवेशित कंपनियों की संख्या में पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 5.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। इस अवधि में देश ने 402.14 अरब युआन का विदेशी निवेश आकर्षित किया।

उन्होंने कहा कि चीन में विदेशी निवेश की गुणवत्ता भी बेहतर हुई है। विशेष रूप से उच्च-प्रौद्योगिकी (हाई-टेक) उद्योगों में निवेश में 33.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। कुल विदेशी निवेश में हाई-टेक क्षेत्र की हिस्सेदारी बढ़कर 42.4 प्रतिशत हो गई है। यह संकेत देता है कि वैश्विक निवेशक चीन के तकनीकी और औद्योगिक विकास पर अब भी भरोसा जता रहे हैं।

येन डोंग के अनुसार, इस वर्ष की पहली छमाही में लगभग 4,800 विदेशी कंपनियों ने चीन में अपने निवेश का विस्तार किया। उनका कहना था कि चीन का विशाल उपभोक्ता बाजार, मजबूत औद्योगिक ढांचा और निरंतर विकसित हो रही तकनीकी क्षमता विदेशी निवेशकों को आकर्षित कर रही है। सरकार भी निवेश माहौल को बेहतर बनाने और अंतरराष्ट्रीय कंपनियों को अधिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए लगातार नीतिगत सुधार कर रही है।

हालांकि, विश्लेषकों का कहना है कि चीन और अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंध अभी भी कई चुनौतियों से गुजर रहे हैं। तकनीक, रणनीतिक उद्योगों, निर्यात नियंत्रण और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर दोनों देशों के मतभेद बने हुए हैं। ऐसे में प्रस्तावित शुल्क कटौती और व्यापार परिषद को इन संबंधों में विश्वास बहाली की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देश प्रस्तावित शुल्क कटौती समझौते को अंतिम रूप देने में सफल होते हैं, तो इससे वैश्विक व्यापार को भी सकारात्मक संकेत मिलेगा। लंबे समय से जारी टैरिफ विवाद के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बनी अनिश्चितता कम हो सकती है और निवेश तथा व्यापारिक गतिविधियों को नई गति मिल सकती है।

फिलहाल दोनों देशों के बीच तकनीकी स्तर पर बातचीत जारी है। उद्योग जगत और व्यापार संगठनों से प्राप्त सुझावों के आधार पर अंतिम मसौदा तैयार किया जाएगा। इसके बाद उत्पादवार शुल्क कटौती और व्यापार परिषद के संचालन की औपचारिक घोषणा की जा सकती है। दुनिया की नजर अब इस बात पर टिकी है कि चीन और अमेरिका अपनी आर्थिक साझेदारी को किस दिशा में आगे बढ़ाते हैं और यह समझौता वैश्विक अर्थव्यवस्था को कितना प्रभावित करता है।

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